दरअसल, 28 जुलाई के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे छात्रों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने को कहा था, जिनका कोई ‘क्रिमिनल एंटीसिडेंट’ नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि यह शब्द स्पष्ट नहीं है और छोटे-मोटे मामलों में नाम आने वाले छात्रों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके बाद अदालत ने यह स्पष्टीकरण दिया।