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अब दुश्मनों की खैर नहीं! भारतीय सेना को मिली मजबूती, DRDO ने पेश किए नेक्स्ट-जनरेशन आर्मर्ड व्हीकल्स

देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए DRDO ने नेक्स्ट-जनरेशन आर्मर्ड व्हीकल्स विकसित किए हैं। भारतीय सेना इन व्हीकल्स को अलग-अलग ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से प्रयोग कर सकेगी।
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भारत

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Vinay Shakya

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Updated: 26 Apr 2026, 1:41 AM IST

DRDO

भारतीय सेना के लिए DRDO ने पेश किए नेक्स्ट-जनरेशन आर्मर्ड व्हीकल्स (Photo- IANS)

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने शनिवार को देश की रक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए एडवांस्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म (ट्रैक्ड और व्हील्ड संस्करण) का अनावरण किया है। इन अत्याधुनिक बख्तरबंद वाहनों को व्हीकल्स रिसर्च एंड डवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (VRDE) ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड जैसे प्रमुख निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर तैयार किया है। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित (VRDE) परिसर में (DRDO) के चेयरमैन और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने इन वाहनों को औपचारिक रूप से पेश किया।

मैदान, रेगिस्तान और पानी में ऑपरेशन कर सकेगी सेना

देश की रक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए पेश किए गए आर्मर्ड प्लेटफॉर्म ट्रैक्ड (चेनयुक्त) और व्हील्ड (पहियायुक्त) दोनों रूपों में तैयार किए गए हैं। भारतीय सेना अलग-अलग ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से इनका प्रयोग कर पाएगी। ट्रैक्ड संस्करण रेगिस्तानी, पहाड़ी और कठिन इलाकों में बेहतर गतिशीलता प्रदान करेगा, जबकि व्हील्ड संस्करण शहरी क्षेत्रों, मैदानी इलाकों और सड़क नेटवर्क पर तेजी से तैनाती के लिए उपयुक्त है। ये दोनों वेरिएंट में हाइड्रो जेट सिस्टम लगा है, जिसकी मदद से ये नहरों, नदियों और जल क्षेत्रों को आसानी से पार कर सकते हैं। यह क्षमता इन्हें एम्फीबियस (जल-स्थल दोनों में सक्षम) बनाती है।

स्वदेशी तकनीक से तैयार किए गए आर्मर्ड व्हीकल्स

भारतीय सेना के लिए तैयार किए गए आर्मर्ड प्लेटफॉर्म वाहनों में करीब 65 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत इसे भविष्य में 90 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।

मारक क्षमता

रक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए तैयार किए गए नेक्स्ट-जनरेशन आर्मर्ड व्हीकल्स प्लेटफॉर्म में स्वदेशी रूप से विकसित 30 MM क्रूलेस टर्रेट (बिना चालक दल वाली टॉवर) लगाई गई है, जिसमें 7.62 MM पीकेटी मशीन गन भी शामिल है। यह सिस्टम एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) दागने में सक्षम है। क्रूलेस टर्रेट की वजह से सैनिकों को सीधे दुश्मन की गोलीबारी के जोखिम से बचाया जा सकेगा। आधुनिक युद्धक्षेत्र की मांगों को ध्यान में रखते हुए इन वाहनों को गतिशीलता, मारक क्षमता और सुरक्षा के बेहतरीन संतुलन के साथ डिजाइन किया गया है।

सुरक्षा क्षमता

सेना के लिए तैयार किए गए इन वाहनों में उन्नत ब्लास्ट और बैलिस्टिक सुरक्षा दी गई है। ये STANAG 4/5 स्तर की सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे 14.5 MM भारी मशीन गन और 25 MM ऑटोमैटिक कैनन जैसे हमलों के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे युद्ध की स्थिति में सैनिकों का सुरक्षा घेरा मजबूत बनेगा और वे लंबे समय तक लड़ाई जारी रख सकेंगे। यह उपलब्धि भारतीय सेना के लिए एक बड़ा तोहफा है। इससे न केवल सीमा सुरक्षा बल्कि, विभिन्न तरह के हमलों में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ेगी।