1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पूर्वोत्तर से लक्षद्वीप तक, तीव्र ब्राडबैंड सेवाओं से जुड़ेगा देश का हर कोना

जीसैट शृंखला के नए उपग्रह जीसैट-एन-2 के प्रक्षेपण की तैयारी में इसरो 4700 किग्रा भार, 32 बीम, 48 जीबीपीएस क्षमता पहली बार स्पेसएक्स के रॉकेट फाल्कन-9 से होगा प्रयोग

2 min read
Google source verification
isro

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) हाई-थू्रपुट संचार उपग्रह जीसैट-एन-2 (जीसैट-20) के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। यह उपग्रह इसरो की वाणज्यिक इकाई न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एन-सिल) का है जिसे बाजार की मांग के आधार पर लांच अमरीकी कंपनी स्पेस-एक्स के प्रक्षेपणयान फाल्कन-9 से प्रक्षेपित किया जाएगा।
यह दूसरा अवसर है जब एन-सिल मांग-आधारित उपग्रह लांच करने जा रहा है। इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक यह उपग्रह अगस्त महीने के पहले पखवाड़े में लांच होगा। उपग्रह का परीक्षण और कक्षीय ऑपरेशन चल रहा है। उपग्रह को अभी प्रक्षेपण के लिए भेजा नहीं गया है।
जुड़ेगा भारत का हर कोना
इसरो ने शनिवार को जीसैट-एन-2 के बारे में विस्तृत विवरण साझा करते हुए कहा कि, 4700 किलोग्राम वजनी यह केए-केए (का-का) बैंड उपग्रह है जिसके 32 यूजर बीम अंडमान-निकोबार द्वीप और लक्षद्वीप समेत पूरे भारत को कवर करेंगे। इनमें से 8 नैरो स्पॉट बीम पूर्वोत्तर क्षेत्र को जबकि, 24 वाइड बीम शेष भारत को कवर करेंगे। यह उपग्रह 14 साल के मिशन पर भेजा जा रहा है जो पूरे भारतीय क्षेत्र में ब्रॉडबैंड सेवाओं और इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी (आइएफसी) को बढ़ाएगा। इस उपग्रह की क्षमता 48 जीबी प्रति सेकेंड है और यह देश के दूर-दराज के गांवों को इंटरनेट से जोड़ेगा।
अनूठी संरचना, बेहतर प्रणोदन प्रणाली
इसरो ने कहा है कि, उपग्रह की संरचना मानक कार्बन फाइबर प्रबलित पॉलिमर (सीएफआरपी) से तैयार की गई है और यह 14-के बस आधारित है। यह किसी भी प्रमुख प्रक्षेपण यान से लांच किया जा सकता है। इसकी प्रणोदन प्रणाली भी अनूठी है।
एन-सिल का मांग आधारित दूसरा उपग्रह
एन-सिल का यह मांग आधारित दूसरा उपग्रह है। इससे पहले एन-सिल ने जून 2022 में मांग आधारित पहला उपग्रह जीसैट-24 लांच किया था। अंतरिक्ष सुधारों के तहत एन-सिल अब उपग्रहों का स्वामित्व हासिल कर सकता है और उसे संचालित भी कर सकता है। फिलहाल एन-सिल के 11 उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में ऑपरेशनल हैं। वहीं, यह पहला अवसर है जब कोई भारतीय उपग्रह अमरीकी कंपनी स्पेसएक्स के प्रक्षेपणयान से लांच किया जाएगा। फाल्कन-9 री-यूजेबल दो चरणों वाला प्रक्षेपणयान है। यह विश्व का पहला आर्बिटल क्लास री-यूजेबल लांच व्हीकल है।