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जानिए कौन हैं एसपी डॉ यशवीर सिंह, जिन्हें जज ने चार घंटे तक कोर्ट में खड़ा रहने का दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में बस्ती पुलिस की लापरवाही पर एसपी को चार घंटे तक खड़ा रखा। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा- जिस व्यक्ति के पास जिले का प्रभार है, उसे अपने इंस्पेक्टर या सिपाही द्वारा दी गई जानकारी के प्रति सचेत रहना चाहिए। इसके बाद एसपी ने कोर्ट से माफी मांगी।

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बस्ती

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anoop shukla

Apr 18, 2026

Up news, basti,

फ़ोटो सोर्स: सोशल मीडिया, एसपी डॉक्टर यशवीर सिंह

IPS Yashveer Singh : यूपी में एक मामला काफी चर्चा में है, जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती जिले के एसपी डॉ यशवीर सिंह पर सख्त नाराजगी जताई। हत्या के एक केस में पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई और चार घंटे तक अदालत में खड़ा रहने का निर्देश दिया।

जानिए क्यों नाराज हुआ हाईकोर्ट

यह मामला एक युवती की हत्या से जुड़ा है, इस केस में बस्ती पुलिस की तरफ से कोर्ट में जो शपथ पत्र दिया गया, उसमें कई गलत जानकारियां पाई गईं ,इतना ही नहीं समय पर रिपोर्ट भी कोर्ट को नहीं भेजी गई।जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई, तो उसमें वे सबूत नहीं मिले, जिनका जिक्र पुलिस ने अपनी जांच में किया था।

कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जिले के प्रमुख अधिकारी होने के नाते एसपी को अपने अधीन काम करने वाले पुलिसकर्मियों की दी गई जानकारी को अच्छी तरह जांचना चाहिए। बाद में एसपी ने कोर्ट से माफी मांगी, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें सजा देने के बजाय चेतावनी देते हुए कोर्ट उठने तक खड़े रहने का आदेश दिया।

कौन हैं IPS डॉ यशवीर सिंह?

डॉ यशवीर सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उन्होंने साल 2012 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की थी। उन्हें तेज-तर्रार और एक्शन लेने वाले पुलिस अधिकारी के रूप में जाना जाता है। फिलहाल वह बस्ती जिले में एसपी के पद पर तैनात हैं। उनकी पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने वेटरनरी साइंस में B.Sc की डिग्री ली है और एक समय पर वह वेटरनरी डॉक्टर भी रह चुके हैं।

डीजीपी प्रशंसा चिन्ह गोल्ड से सम्मानित हैं एसपी

अपने करियर के दौरान डॉ यशवीर सिंह ने कई जिलों में काम किया है, जिनमें गाजीपुर और सोनभद्र जैसे जिले शामिल हैं। खासतौर पर सोनभद्र में तैनाती के दौरान उन्होंने पशु तस्करी और नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। उनकी इस कार्रवाई के लिए उन्हें डीजीपी प्रशंसा चिन्ह गोल्ड से सम्मानित भी किया गया था।यह सम्मान पुलिस विभाग में बेहतरीन काम करने वाले अधिकारियों को दिया जाता है।डॉ यशवीर सिंह मूल रूप से उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रायसी गांव के रहने वाले हैं, साधारण परिवार से ताल्लुक़ रखने वाले यशवीर ने कड़ी मेहनत कर आईपीएस क्वालीफाई किए।