
28 जुलाई से शुरु होने जा रही है कांवड़ यात्रा, जानें महत्व
हर वर्ष श्रावण माह में चतुर्दशी के दिन यह पर्व मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कांवड़ यात्रा श्रावण (सावन) (जुलाई-अगस्त) के पवित्र महीने के दौरान होती है। इस वर्ष कांवड़ यात्रा 28 जुलाई 2018 से शुरु होगी। कावड़ यात्रा में हजारों की संख्या में शिवभक्त केसरिया रंग के कपड़े पहनकर कंधों पर कांवड़ लेकर ऋषिकेश, हरिद्वार आदि जगहों पर जाकर पवित्र गंगा का जल लाते है। उसके बाद घर आकर अपने घर के आस-पास वाले शिव मंदिर में जाकर उसी गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने से मनवांछित फल प्राप्त होता है।
कांवड़ यात्रा का महत्व
पूरे भारत देश में कांवड़ यात्रा का बहुत महत्व माना जाता है। कांवड़ यात्रा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार में यह उत्सव प्रमुख रूप से मनाया जाता है। शिवभक्त यात्रा के दौरान 'बोल बम' और 'हर हर महादेव' जैसे नारे लगाते है। चारों तरफ हरियाली और भक्तिमय वातावरण होता है। ऐसे में सावन का महीना इन सब में चार चांद लगा देता है। शिवभक्त भांग, बेलपत्र, धतूरे, फूलों, दूध, चीनी आदि को गंगाजल में मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस पर्व को उत्तर भारत में विशेष रूप से गंगा नदी के किनारे स्थित स्थानों में मनाया जाता है। भक्त गंगा नदी तक पैदल यात्रा करते है, गंगा का पवित्र जल लेकर आते है और उसी से शिवलिंग का अभिषेक करते है।
ऐसा माना जाता है सावन के महीने में सभी देवता आराम करने निद्रा में चले जाते हैं। उस समय सभी देवताओं का कार्य भगवान शिव करते हैं। इसलिए इस माह को भोलेनाथ का प्रिय माह कहा जाता है। कांवड़ यात्रा अन्य यात्राओं की तुलना में आसान होती है और इसमें खर्च भी काफी कम होता है। इसलिए हर वर्ग का व्यक्ति इसे करता है। कुछ भक्त तो उत्तर भारत में हिमालय के गोमुख का पवित्र गंगा जल लेकर दक्षिण भारत में तमिलनाडु राज्य में स्तिथ रामेश्वरम मंदिर तक की यात्रा करते है, जिसमें 6 महीने तक का समय लग जाता है। वे रामेश्वरम मंदिर में बनी हुई शिवलिंग का अभिषेक करते है। सावन का महीना आते ही शिव मंदिरों में तांता लग जाता है।
इन प्रमुख मंदिरों में चढ़ाया जाता है कांवड़ यात्रा के बाद जल।
8. पुरामहादेव
Published on:
13 Jul 2018 01:37 pm
