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भगवान शिव की आरती: ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा

आज महाशिवरात्रि का पावन पर्व है। इस दिन भगवान शिव की विधि विधान पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में कोई भी पूजा बिना आरती किए अधूरी मानी जाती है। तो ऐसे में महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की इस आरती को करना न भूलें।

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ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा

Shiv Aarti: महाशिवरात्रि पर्व इस बार 1 मार्च को मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म के लोगों के लिए ये पर्व बेहद ही खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस दिन भगवान शिव का प्राकट्य हुआ था। वहीं कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से महादेव की उपासना करता है उसे जीवन में सम्पूर्ण सुख प्राप्त होते हैं। महाशिवरात्रि पर रात्रि के चारों पहर में पूजा की जाती है।

शिव जी की आरती:
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा। पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा। भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला। शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र:
-महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय
मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

-शिव जी का मूल मंत्र
ऊँ नम: शिवाय।।

-रुद्र गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

-भगवान शिव के प्रिय मंत्र:
-ॐ नमः शिवाय।
-नमो नीलकण्ठाय।
-ॐ पार्वतीपतये नमः।
-ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।
-ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा।

महाशिवरात्रि पूजा शुभ मुहूर्त:
-पहले पहर की पूजा आमतौर पर संध्याकाल से शुरू होती है। इसके लिए सबसे अच्छा समय शाम 6 बजे से लेकर रात 9 बजे तक माना जाता है। पहले पहर में भगवान शिव को दूध अर्पित किया जाता है।
-दूसरे पहर की पूजा रात 9 बजे से लेकर 12 बजे के बीच की जाती है। इस पहर में शिव जी को दही अर्पित किया जाता है।
-तीसरे पहर की पूजा रात 12 बजे से 3 बजे के बीच की जाती है। इस दौरान भगवान शिव को गाय के घी से तिलक लगाकर उनका जल से अभिषेक किया जाता है।
-चौथे पहर की पूजा रात 3 बजे से सुबह 6 बजे के बीच की जाती है। इस दौरान शिव जी को शहद लगाकर उनका जल से अभिषेक किया जाता है।
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