
संगीत से प्यार करना जरूरी
आनंदम निवासी 35 वर्षीय धर्मेन्द्र विश्वकर्मा संगीत के शिक्षक हैं। घर में उनके संगीत का माहौल शुरु से रहा है। पिता स्व. चन्द्रिका प्रसाद विश्वकर्मा तबला वादक रहे। धर्मेन्द्र आज बच्चों को तबला की शिक्षा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि संगीत में जादू जैसा असर है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी के द्वारा मधुर तान छेडकऱ तीनों लोकों को मोह लिया था। प्रकृति के कण-कण में संगीत की सजीवता विद्यमान होती है। मैंने इस बात का एहसास बचपन में ही कर लिया था। मेरे पिता भी संगीत से जुड़े थे। उन्हीं को देखकर मेरा प्रेम भी संगीत के प्रति हो गया। धर्मेन्द्र कहते हैं कि हर इंसान जो खुद से प्यार करता है उसे संगीत से जरूर प्यार करना चाहिए।
संस्कारों और शालीनता से जोडऩा है संगीत
बरारीपूरा निवासी संगीत शिक्षक 31 वर्षीय राकेश राज कहते हैं कि संगीत संस्कारों और शालीनता से जुड़ा रखता है। अध्ययन और अध्यापन के क्षेत्र में एकाग्रता वृद्धि में संगीत की विशेष भूमिका है। बिना संगीत के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि घर में भी पिता का संगीत से जुड़ाव रहा। इसके बाद मित्रता भी संगीत प्रेमियों से हो गई। पूरा माहौल संगीत के प्रति हो गया और मैं भी जुड़ गया। इसके बाद उन्होंने संगीतविषय से ही अपनी पढ़ाई पूरी की। एक गायक के तौर पर राकेश प्रदेश के विभिन्न जगहों पर शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति देते हैं।
हर बीमारी की दवा है संगीत
चौकसे कॉलोनी निवासी 40 वर्षीय अमित सोनी बचपन से ही संगीत के प्रति आकर्षित थे, लेकिन पारिवारिक स्थिति की वजह से काफी देर से जुड़ाव है। हालांकि लगन ऐसी थी कि कुछ ही समय में उन्होंने संगीत पर अच्छी पकड़ हासिल कर ली। उनके गुरु कुंज बिहारी सोनी ने उनके प्रतिभा को आगे बढ़ाने का काम किया। अमित कहते हैं कि संगीत हर व्यक्ति को सीखना चाहिए। यह हर कदम पर लोगों की सहायता करता है। हालांकि किसी उद्देश्य से संगीत नहीं सिखना चाहिए।
शौख ही नहीं रोजगार का माध्यम भी है संगीत
शिक्षक कॉलोनी निवासी 32 वर्षीय पंकज बोन्डे संगीत शिक्षक हैं। हाल ही में उनका चयन केन्द्रीय विद्यालय आंध्र प्रदेश में हुआ है। पंकज कुशल हारमोनियम एवं कीबोर्ड का कुशल वादक हैं और शास्त्रीय गायन से जुड़े हुए हैं। पापा शेषराव बोंडे बांसुरी वादक रहे हैं। पंकज कहते हैं कि लोग संगीत को शौख के रूप में देखते हैं। लेकिन अगर व्यक्ति दृढ़ता से मेहनत करे तो रोजगार के रूप में भी यह एक सशक्त माध्यम है। नई शिक्षा नीति में भी इसे जरूरी कर दिया गया है।
सुख-दुख का साथी है संगीत
उभरती संगीत कलाकार एंजल जायसवाल कहती हैं कि संगीत सुनने से दिमाग को शांति मिलती है। संगीत शरीर की कई बीमारियों का इलाज करने में भी सहायक है क्योंकि यह आत्मा का उन्नयन करता है। कहा जाता है कि प्रकृति के कण-कण में संगीत का सुर सुनाई देता है। सुख-दुख का साथी है संगीत जिससे हम कभी नहीं दूर रह सकते। जिंदगी का वजूद ही संगीत से जुड़ा हुआ है।
Updated on:
21 Jun 2024 12:55 pm
Published on:
21 Jun 2024 12:54 pm
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