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सावन की पहली झड़ी, मटियामोती लबालब

बालोद जिले में सावन की पहली झड़ी शनिवार से लगने से मौसम सुहाना हो गया। धूप नहीं निकलने से धान की फसल में तनाछेदक व पत्ती मोड़ कीट की शिकायत आने लगी है। जलाशयों में भी पानी भरपूर मात्रा में है। मटियामोती जलाशय लबालब हो गया है।
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बालोद जिले में सावन की पहली झड़ी शनिवार से लगने से मौसम सुहाना हो गया। धूप नहीं निकलने से धान की फसल में तनाछेदक व पत्ती मोड़ कीट की शिकायत आने लगी है। जलाशयों में भी पानी भरपूर मात्रा में है। मटियामोती जलाशय लबालब हो गया है।

बालोद जिले में शनिवार को सावन की पहली झड़ी लगी। सुबह 11.30 बजे से शुरू हुई बारिश शाम 6 बजे तक लगातार जारी रही। इस मानसून की यह पहली लगातार बारिश है। बारिश से किसानों ने राहत की सांस ली है लेकिन 10 दिनों से धूप नहीं निकलने से धान की फसल में तनाछेदक और पत्ती मोड़ कीट लगने लगे हैं। वहीं लगातार बारिश से जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया है।

अब तक 801.9 मिमी बारिश, मार्रीबंगला में सबसे ज्यादा

इस मानसून सीजन में जिले में अब तक औसत 801.9 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है।
गुंडरदेही - 735.8 मिमी
बालोद - 762.5 मिमी
गुरुर - 726.6 मिमी
डौंडीलोहारा - 935.5 मिमी
डौंडी - 677.1 मिमी
अर्जुंदा - 810.4 मिमी
मार्रीबंगला-देवरी - 965.3 मिमी (सबसे ज्यादा)

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जलाशयों की स्थिति

मटियामोती - 100 प्रतिशत
तांदुला - 76.23 प्रतिशत
खरखरा - 75.36 प्रतिशत
गोंदली - 74.4 प्रतिशत

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अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग ने अगले दो दिन भी अच्छी बारिश का अनुमान जताया है। 23 अगस्त अधिकतम 27-28, न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस तापमान रहेगा। बादल छाए रहेंगे। वहीं 64त्न से 90त्न बारिश की संभावना है। 24 अगस्त अधिकतम 27-28, न्यूनतम 24 सेल्सियस तापमान रहेगा। गरज-चमक के साथ 87त्न से 91त्न बारिश के आसार।

10 दिन से धूप नहीं, धान में लगे कीड़े

लगभग 10 दिनों से बदली छाई रहने से धान की फसल में कीट लग रहे हैं। किसान दवाई का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि फसल के लिए धूप जरूरी है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि मौसम धान की फसल के लिए अनुकूल है लेकिन धूप होना भी जरूरी है। उन्होंने इस बार बंपर उत्पादन की संभावना जताई।

तापमान में गिरावट, बीमारियां बढ़ीं

बदली और नमी से तापमान में भारी गिरावट आई है। दो दिन पहले अधिकतम तापमान 30-31 सेल्सियस था, जो घटकर 26 सेल्सियस रह गया है, जबकि न्यूनतम 24 सेल्ससियस है। यानी अधिकतम और न्यूनतम में ज्यादा अंतर नहीं। बदलते मौसम से जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में बुखार, मलेरिया, सर्दी-खांसी के मरीजों की भीड़ बढ़ गई है।

क्या कहते हैं अधिकारी

सिविल सर्जन डॉ. आरके श्रीमाली ने कहा कि बदलते मौसम का असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जंक फूड और तले-भुने खाने से बचें। बारिश में मच्छरों का प्रकोप ज्यादा है। मच्छरदानी का उपयोग करें और पूरे कपड़े पहनें। वहीं उप संचालक कृषि आशीष चंद्राकर ने कहा कि लगातार बदली से फसल पर असर पड़ता है पर अभी नुकसान नहीं है। किसान खेतों की निगरानी करें। बारिश के लक्षण होने पर दवाई न छिड़कें, धूप खिलने पर ही छिड़काव करें। किसान कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लें।