
तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने तीन गौवंशों को कुचल दिया। तीन बछड़े घायल होकर तड़पते रहे। यह कोई हादसा नहीं, रोज की हकीकत बन गई है। अगस्त महीने में 22 गौवंश की मौत हो चुकी है। बालोद-दल्ली मार्ग पर यह दुर्घटना हुई। इससे पहले अगस्त के पहले हफ्ते का एक साथ 8 गौवंशों की सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी। बालोद-दुर्ग और बालोद-दल्ली मार्ग तो उनके लिए श्मशान बन गए हैं। इतनी मौतों के बाद भी जिला और नगर प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं।
शाम 7 बजते ही शहर की सड़कें गौशाला बन जाती हैं। जयस्तंभ चौक, मधु चौक, गंजपारा, बुधवारी बाजार, सिवनी मार्ग हर जगह 300 से 400 गौवंश सड़क पर बैठे मिलते हैं। अंधेरे में काली गाय दिखती नहीं और तेज रफ्तार गाड़ी सीधे उनके ऊपर से गुजर जाती है।
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एक गांव से भगाए जाते हैं, दूसरे गांव में जाते हैं। वहां से भी लाठियां खाकर सीधे हाईवे पर आ जाते हैं। कई पालतू हैं। दूध निकालकर मालिक खुद सड़क पर छोड़ देता है। भूखे पेट ये बेजुबान पॉलीथिन खाने को मजबूर हैं। नयापारा के हेमलाल साहू बताते हैं, वार्ड की सड़क पर बैठे 200 गौवंशों को हांक कर गौधाम ले तो गए, पर वहां चारा ही नहीं है। भूख से फिर सड़क पर लौट आते हैं।
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शासन की योजनाएं कागजों में ही सिमट गईं, तो गौ रक्षा दल के युवाओं ने छोटी सी कोशिश शुरू की। वे रात-रात भर जागकर सड़कों पर बैठे गौवंशों के गले में चमकने वाली रेडियम पट्टी बांध रहे हैं, जिससे अंधेरे में ड्राइवर को दूर से ही वे दिख जाएं और एक जान बच जाए। पुलिस और नगर पालिका की टीम भी दिन में उन्हें हटाती है, पर रात होते ही वही मंजर।
नगर पालिका बालोद के सीएमओ खिरोद भोई ने कहा कि नगर पालिका की टीम शहर की सड़कों से गौवंशों को हटाने के लिए लगी है पर लोग बाहर से गौवंश शहर में छोड़ रहे हैं।
गौरक्षा अभियान के सदस्य अजय यादव ने कहा कि रोज हमारी आंखों के सामने गौ माता तड़प कर मर रही है। प्रशासन को गंभीर होना होगा। हम बस रेडियम पट्टी बांधकर उनकी सांसें बचा रहे हैं।
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Updated on:
21 Aug 2026 11:39 pm
Published on:
21 Aug 2026 11:39 pm
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