
बरेली। डेढ़ साल बाद छाया ग्रह राहू व केतु अपनी राशि बदल रहे हैं। शनिवार सुबह 7:39 पर राहू ने कर्क राशि में प्रवेश किया है। कर्क राशि में राहू का गोचर एवं मकर राशि में केतु का गोचर 23 मार्च 2019 तक रहेगा। राहू और केतु मध्यम गति के आधार पर उनका राशि परिवर्तन 18 अगस्त 2017 को प्रातः 05:47 बजे पर क्रमशः कर्क और मकर राशि में हुआ था। शनिवार को वास्तविक गति के आधार पर राहू एवं केतु ने क्रमशः कर्क एवं मकर राशि में प्रवेश किया।
बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा के अनुसार राहू एवं केतु छाया ग्रह होने के बाद भी भारतीय ज्योतिष ग्रहों में मुख्य स्थान रखते हैं। प्रत्येक डेढ़ वर्ष में इनका गोचर एक राशि से दूसरी राशि में होता है। भारतीय ज्योतिष में राहू एवं केतु की दो प्रकार की गतिविधियां प्रचलन में हैं - 1. मध्यम गति 2. वास्तविक गति। इन्हें मध्यम और शुद्ध गति भी कहते हैं। राहू और केतु मध्यम गति के आधार पर उनका राशि परिवर्तन 18 अगस्त 2017 को प्रातः 05:47 बजे पर क्रमशः कर्क और मकर राशि में हुआ था। वहीं 09 सितम्बर 2017 को प्रातः 07:39 बजे वास्तविक गति के आधार पर राहू एवं केतु क्रमशः कर्क एवं मकर राशि में प्रवेश हुआ।
राहू शत्रु सिंह राशि से निकल कर शत्रु राशि कर्क में प्रवेश करेगा। कर्क राशि में राहू का गोचर एवं मकर राशि में केतु का गोचर 23 मार्च 2019 तक रहेगा। इस बीच राहू आश्लेषा, पुष्य एवं पुर्नवसु के चतुर्थ चरण में अर्थात् राहू, बुद्ध व शनि गुरू के नक्षत्र में रहेंगे। बुद्ध, शनि, राहू के परम मित्र हैं, राशि स्वामी चन्द्रमा राहू के शत्रु हैं, अतः राहू के शुभ-अशुभ दोनों परिणाम प्राप्त होंगें।
केतु धनिष्ठा के दूसरे, श्रवण एवं उत्तराषाढ़ा के तीन चरण में रहेंगे अर्थात केतु चन्द्रमा, मंगल, सूर्य के नक्षत्र में रहेंगे। केतु जब मंगल के नक्षत्र में रहेंगे तो शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। परन्तु जब सूर्य एवं चन्द्रमा के नक्षत्र में रहेंगे तो ग्रहण योग बनाकर अशुभ परिणाम देंगे।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार क्रूर ग्रह का उपचय स्थान में बैठना शुभ माना जाता है। अर्थात राहू एक क्रूर ग्रह होने के कारण इसका किसी भी राशि से 03, 06, 10, 11 स्थान पर बैठना शुभ फलों की प्राप्ति करवायेगा। अतः राहू-वृषभ राशि/लग्न के लिए तीसरा, कुंभ राशि/लग्न के लिए छठा, तुला राशि/लग्न के लिए दशम एवं कन्या राशि/लग्न के लिए ग्यारहवें होंगे। अतः ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वृषभ, कुंभ, तुला एवं कन्या राशि/लग्न के लिए शुभ फल प्रदान करेंगे। इसी प्रकार केतु का गोचर मकर राशि में होने से वृश्चिक राशि के लिए तीसरे, सिंह राशि के लिए छठे, मेष राशि के लिए दशम एवं मीन राशि के लिए ग्यारहवें होंगे। अतः मेष, वृश्चिक, सिंह एवं मीन राशि/लग्न के लिए शुभ कारक होंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहू-केतु कभी भी दोनों एक साथ एक राशि के लिए शुभ नहीं होते।
राहू के उपायः-
राहू के अशुभ फलों में कमी के लिए एवं शुभ फलों की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित उपाय करना श्रेष्ठ रहेगा।
1. ऊँ रां राहवे नमः मंत्र का जाप करें
2. भगवान शिव एवं दुर्गा की पूजा उपासना करें
3. ऊँ हौं जूं सः मंत्र का भी नित्य जाप करें
4. आठ मुखी रूद्राक्ष माला धारण करें
5. गोमेद रत्न भी धारण किया जा सकाता है
6. पढ़ने वाले छात्रों को माँ सरस्वती की पूजा-उपासना करना श्रेष्ठ रहेगा
7. निम्नलिखित मंत्र ऊँ नीलवर्णाय विद्महे, सैंहिकेयाय धीमहि, तन्नो राहूः प्रचोदयात् का जप करें।
केतु के उपायः-
1. केतू के मंत्र ऊँ ह्रीं केतवे नमः का जाप करें
2. नौ मुखी रूद्राक्ष धारण करें
3. लहसुनिया रत्न भी धारण किया जा सकता है।
Published on:
09 Sept 2017 04:55 pm
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