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राजस्थान पुलिस में हड़कंप: रेत के ‘काले खेल’ का बड़ा खुलासा, विजिलेंस की रडार पर कई बड़े अफसर

Bhilwara Garnet Mafia: ‘रेत के सोने’ के काले खेल का खुलासा होने के बाद विजिलेंस ने जांच तेज कर दी है। वसूली के सिंडिकेट से पुलिस महकमा हिल गया, कई अफसर रडार पर हैं।

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Rajasthan Police on Alert as Sand Mining Scam Exposed Several Top Officers Under Vigilance Radar

विजय सिंह प​थिक नगर में जांच करते जीआरपी एसपी और पुलिस अ​धिकारी (फोटो- पत्रिका)

Bhilwara Garnet Mining Scam: भीलवाड़ा: वस्त्रनगरी के कोटड़ी क्षेत्र में 'रेत के सोने' यानी अवैध गारनेट के काले कारोबार में खाकी और रसूखदारों के बीच पनपे इस गठजोड़ का खुलासा होने के बाद पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा की विशेष विजिलेंस टीम (अजमेर जीआरपी एसपी नरेंद्र सिंह) ने भीलवाड़ा में डेरा डाल दिया है, जिससे न केवल महकमे में हड़कंप मचा है, बल्कि सत्ता के गलियारों में भी 'भूचाल' की स्थिति बनी हुई है।

राजस्थान पत्रिका की ओर से प्रमुखता से उठाए गए इस प्रकरण के बाद अब विजिलेंस टीम की नजर उस अवैध वसूली के 'खेल' पर है, जिसमें रसूख के दम पर लाखों रुपयों के वारे-न्यारे किए। इधर, उपाध्याय पर लगे आरोपों को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि कहीं किसी के इशारे पर तो आईपीएस को फंसाने का यह बड़ा खेल तो नहीं खेला जा रहा है।

अजमेर जीआरपी एसपी नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में सोमवार को आई टीम ने दो दिन के दौरान पुर और कोटड़ी थाने में घंटों बैठकर साक्ष्य जुटाए। जांच की सुई उन लाखों रुपयों की ओर घूम रही है, जो अवैध खननकर्ताओं से पुलिस के नाम पर डरा-धमकाकर वसूले गए थे।

दूसरी ओर पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव ने उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया है, जो नियमों को ताक पर रखकर जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा के खास और प्रकरण के मुख्य आरोपी अजय पांचाल के साथ गलबहियां करते नजर आए। गिरफ्तार आरोपी अजय पांचाल, नंद सिंह, नारायण गुर्जर और कालू गुर्जर के मोबाइल अब पुलिस के पास राज उगल रहे हैं।

विशेष टीम ने जांच के दायरे में आए आईपीएस माधव उपाध्याय के खास रहे लोगों के ठिकानों पर भी दबिश दी। पथिक नगर में भी टीम ने कुछ दस्तावेज जुटाए। उपाध्याय के अधीन कार्यालयों व पुलिस थानों के स्टॉफ से भी कई पुलिस कर्मियों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, चारों आरोपियों के घरों, कार्यालयों और ठिकानों पर भी पुलिस टीम पहुंची। विजिलेंस टीम प्रभारी पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह ने बताया कि समूचे मामले की जांच शुरू कर दी है।

कहीं खेला तो नहीं…

समूचे घटनाक्रम को लेकर सुर्खियों में आए आईपीएस माधव उपाध्याय ने समूचे मामले में उनकी भूमिका पर उठाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बजरी और गारनेट माफिया के खिलाफ उनकी कार्रवाई असरकारक रही है। इस दौरान कई माफिया तक नपे हैं। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

गारनेट वसूली कांड में सीएम का कड़ा रुख

गारनेट माफिया से अवैध वसूली के मामले ने प्रदेश की सियासत और पुलिस महकमे में तूफान ला दिया है। इस सिंडिकेट के तार सत्ताधारी दल के विधायक और एक आईपीएस अधिकारी से जुड़ने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद कमान संभाल ली है।

विधायक और IPS की संदिग्ध भूमिका

मुख्यमंत्री कार्यालय इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है। जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा के प्रतिनिधि और मुख्य आरोपी अजय पांचाल के बीच नजदीकियों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। चूंकि, मीणा भाजपा एसटी मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं, इसलिए सीएम स्वयं जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा से फीडबैक ले रहे हैं।

दूसरी ओर भीलवाड़ा सदर के एएसपी (IPS) माधव उपाध्याय की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से एपीओ (APO) कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने संगठन से आईपीएस की गतिविधियों को लेकर भी तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।

रिमांड पर आरोपी

पुर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी अजय पांचाल समेत नंद सिंह, कालू गुर्जर और नारायण गुर्जर को सोमवार को सिविल न्यायाधीश (कोटड़ी) के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

आगे की कार्रवाई

भाजपा जिलाध्यक्ष मेवाड़ा के अनुसार, सीएम को जल्द ही पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस मामले के उजागर होने से यह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत अब जांच की आंच बड़े चेहरों तक पहुंचना तय है। पुलिस की रिमांड रिपोर्ट के बाद कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।