श्रावण के पहले सोमवार बाबा ओंकारनाथ और ममलेश्वर भगवान की शाही पालकी सवारी निकाली गई। ज्योतिर्लिंंग ओंकारनाथ ने 7 घंटे नगर भ्रमण किया। मंदिर से निकली शाही सवारी शाम 4 बजे शाही सवारी ओंकारेश्वर मंदिर से कोटि तीर्थ घाट पहुंची। यहां पर ज्योतिर्लिंग ओंकारनाथ का दुग्धाभिषेक, पूजन कर नौका विहार कराया गया। नौका विहार और नगर भ्रमण के बाद भगवान ओंकारनाथ और ममलेश्वर की सवारी को मंदिर ले जाया गया। रात करीब 10 बजे भगवान ओंकारनाथ की सवारी ओंकारेश्वर मंदिर पहुंची।
श्रावण मास के प्रथम सोमवार को ज्योतिर्लिंग ओंकार महाराज की सवारी 3 बजे मंदिर परिसर से ढोल धमाकों के साथ निकली। दक्षिण तट पर ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर महाराज की पालकी भी निकली। ओंकार महाराज की रजत प्रतिमा का उत्तर तट कोटितीर्थ घाट, तो वहीं दक्षिण तक गोमुख घाट पर विद्वान पंडितों द्वारा वेद मंत्रों से पंचामृत और नर्मदा जल से पंचामृत अभिषेक पूजन किया। महाआरती के बाद दोनों पालकियों को नर्मदाजी में नौका विहार कराया गया। उसके बाद रेती घाट पर उतरकर दोनों सवारी आगे बढ़ी। यहां भक्त लोग भोलेशंभू भोलेनाथ का उद्घोष करते हुवे आगे आगे चल रहे थे।
किया पालकी का मार्ग परिवर्तन
इस वर्ष मार्ग परिवर्तन किया गया और काशी विश्वनाथ, बलवाड़ी, पुराने बस स्टैंड, मुख्य बाजार से होकर जेपी चौक से लाया गया। पूर्व में सीढिय़ां चढकऱ खेड़ाजी की दुकान से ले जाया जाता था। पिछले दिनों जनप्रतिनिधियों ने मार्ग परिवर्तित करने मांग रखी थी। एसडीएम शिवम प्रजापति ने मांग को स्वीकार करते हुवे प्रथम सोमवार की पालकी का मार्ग परिवर्तन किया। मार्ग में जगह जगह गुलाल और गुलाब की पंखुड़ी उड़ाकर स्वागत कर और कपूर आरती की। पालकी के साथ पुलिस बल विशेष रूप लगाया गया था। इसके पूर्व श्रावण मास के पहले सोमवार सुबह से करीब 80 हजार श्रद्धालु दर्शन, नर्मदा स्नान के लिए तीर्थ नगरी पहुंचे। श्रावण मास के प्रथम सोमवार अपेक्षाकृत कम भीड़ रही। श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन की व्यवस्थाएं भी चौकस रही।