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150 साल पुरानी बद्रीनाथ की आरती में छिपा है यह अनजाना रहस्य

मंदिर से जुड़ा हुआ है सांप्रदायिक सौहार्द का नायाब उदाहरण

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Tanvi Sharma

Apr 28, 2018

badrinath

उत्तराखंड के चारधाम में शामिल प्रमुख धाम बदरीनाथ हिंदुओं की आस्था का प्रतीक माना जाता है। पूरी दुनिया भगवान बदरीनाथ की पूजा करती है। चारधाम में शामिल प्रमुख धाम बदरीनाथ की रोज पट खुलने से बंद होने तक मंदिर में रोज़ाना सुबह-शाम आरती की जाती है। उनके मंदिर से सांप्रदायिक सौहार्द का भी एक नायाब उदाहरण जुड़ा हुआ है। क्योंकि सुबह-शाम की जाने वाली आरती एक फकरुद्दीन नाम के युवक ने 18 वर्ष की उम्र में 151 साल पहले लिखी थी। तब से यही आरती यहां गायी जाती है। संस्कृत में लिखी गई इस आरती के बोल इस प्रकार हैं। 'पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितंम, निकट गंगा बहति निर्मल श्री बदरीनाथ विशम्भरम।'

पोस्ट मास्टर फकरुद्दीन उर्फ बदरुद्दीन साहब की कई पुश्ते आदिकाल से नन्दप्रयाग में ही पली बढ़ी हुई। फकरुद्दीन ने जब इस आरती की संरचना की तो उसी दिन से उन्होनें अपना नाम बदलकर बद्रीनाथ का बदरुद्दीन कर दिया था। इस आरती में बद्रीनाथ धाम के धार्मिक महत्व के अलावा यहां की सुंदरता का भी वर्णन किया गया है। फकरुद्दीन उर्फ बदरुद्दीन बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में सदस्य रहें और वे तत्कालीन मुस्लिम कम्युनिटी के राष्ट्रीय सदस्य भी थे। 104 साल की उम्र में 1951 वर्ष में उनका देहांत हुआ। बदरुद्दीन के पोते अब भी यहीं रहते हैं। जानकारों का कहना है कि बदरीनाथ धाम में मंदिर परिसर की दिवारों पर आरती को लिखा गया था।

जिला पंचायत सदस्य भुवन नौटियाल कहते हैं कि यहां पहाड़ में आपस में भाईचारे की मिसाल हैं। दोनों समुदायों की मेहनत और एकता से पहाड़ मजबूती से टीका है। यही नहीं यहां रिश्तों की अहमियत धार्मिक आयोजनों में भी दिखती है। पिछले तीन दशकों से भी ज्यादा समय से रामलीला आयोजन हो रहा है, जिसमें कई मुस्लिम भाई अपना सहयोग देते हैं।

श्री बद्रीनाथ जी की आरती इस प्रकार है

जय जय श्री बद्रीनाथ,
जयति योग ? ध्यानी || टेक ||

निर्गुण सगुण स्वरूप, मेधवर्ण अति अनूप |
सेवत चरण स्वरूप, ज्ञानी विज्ञानी | जय...

झलकत है शीश छत्र, छवि अनूप अति विचित्र |
बरनत पावन चरित्र, स्कुचत बरबानी | जय...

तिलक भाल अति विशाल,
गल में मणि मुक्त-माल |

प्रनत पल अति दयाल,
सेवक सुखदानी | जय....

कानन कुण्डल ललाम,
मूरति सुखमा की धाम |

सुमिरत हों सिद्धि काम ,
कहत गुण बखानी | जय...

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