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Share Market Crash: शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों के 9 लाख करोड़ डूबे, जानिए इस मंदी के बड़े कारण

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट से निवेशकों को 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ग्लोबल संकेत, वेस्ट एशिया तनाव, रुपये की कमजोरी, महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेश निकासी इसके मुख्य कारण रहे।

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Why Share Market Down Today

शेयर मार्केट क्रैश कर गया है। (PC: AI)

भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। दो दिन की बढ़त के बाद शुक्रवार को बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक उथल-पुथल ने मार्केट सेंटिमेंट को कमजोर कर दिया है। सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट के चलते निवेशकों को एक ही दिन में लगभग 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

शेयर बाजार में शुक्रवार को इंट्राडे कारोबार में भारी नुकसान हुआ, जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में 1 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,690 अंक या 2.25 फीसदी गिरकर 73,583 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 487 अंक या 2.09 फीसदी गिरकर 22,819.60 पर बंद हुआ।

बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स में 2.18 फीसदी की गिरावट आई, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.82 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञ इस गिरावट के कुछ प्रमुख कारण बताते हैं।

वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत

शुक्रवार को वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भारतीय बाजार पर सीधा असर डाला। एशियाई बाजारों में जापान और कोरिया के इंडेक्स गिरावट में रहे, जबकि यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी कमजोरी दिखी। वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं। इस अनिश्चित माहौल में जोखिम लेने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे बिकवाली बढ़ती है और बाजार नीचे जाता है।

कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी

वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष ने बाजार को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। अमेरिका और इजराइल से जुड़ी खबरों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से भारत जैसे आयातक देश पर दबाव बढ़ गया है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है, जो बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है।

रुपये की कमजोरी और एफपीआई बिकवाली

भारतीय रुपये में आई कमजोरी ने भी बाजार की स्थिति खराब की है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, सत्र के दौरान भारतीय रुपया 87 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 94.85 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा कम हुआ और उन्होंने बाजार से पैसा निकालना शुरू किया। यु्द्ध शुरु होने के बाद से रुपये में लगभग 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत

लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट का सिलसिला जारी रहने से यह संकेत मिलता है कि बाजार में अभी भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में रिकवरी सीमित रह सकती है। निवेशकों को इस समय सतर्क रणनीति अपनाने और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।