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यात्री बस के लिए तरसे और ड्राइवर दफ्तरों में फरमा रहे आराम! यूपी परिवहन निगम की रिपोर्ट में खुलासा

UP Roadways: उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिसमें पता चला है कि कई ऐसे ड्राइवर और कंडक्टर हैं, जिन्होंने एक साल में एक किलोमीटर भी बस नहीं चलाई, फिर भी लेते रहे हर महीने पूरी सैलरी।

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भारत

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Pratiksha Gupta

Apr 04, 2026

UP Transport, Uttar Pradesh News, Transport Corporation

UP Roadways

UP Roadways:उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) की ताजा समीक्षा रिपोर्ट ने विभागीय कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच की अवधि में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। प्रदेशभर में 1671 चालक ऐसे पाए गए हैं, जिन्होंने इस पूरे समय में एक भी किलोमीटर बस नहीं चलाई, बावजूद इसके वे नियमित रूप से वेतन लेते रहे।

निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

यही नहीं, रिपोर्ट में 1069 परिचालकों (कंडक्टर) भी शून्य किमी श्रेणी में दर्ज है। यानी ये कर्मचारी भी बिना काम किए वेतन उठा रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, निगम के करीब 50% चालक ऐसे हैं जिन्होंने एक भी किलोमीटर बस नहीं चलाई, जबकि परिचालकों में यह आंकड़ा 34% तक है।

यह स्थिति केवल लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि विभाग की मॉनिटरिंग और जवाबदेही प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ओर परिवहन निगम लगातार स्टाफ की कमी का हवाला देता रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों कर्मचारी काम किए बिना ही सिस्टम पर बोझ बने हुए हैं।

सड़कों पर यात्री परेशान, दफ्तरों में आराम फरमा रहें ड्राइवर

इस लापरवाही का सीधा नुकसान यूपी की आम जनता को उठाना पड़ रहा है। कई रूट्स पर बसें टाइम से नहीं मिलने के कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। समीक्ष बैठक में पता चला कि इन ड्राइवरों को बस चलाने के बजाए दफ्तरों के बाबूगिरी वाले कामों, अफसरों की स्टाफ कार चलाने या अन्य वीआईपी ड्यूटी में लगा दिया गया था। विभाग की इस लापरवाही ने पूरी बस सेवा को पटरी से उतार दिया है।

मुख्यालय सख्त, मांगी गई नामवार लिस्ट

रोडवेज मुख्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कारवाई के लिए कहा है। साथ ही जिन कर्मचारियों ने जीरो किलोमीटर बस चलाई है, उनकी नामवार सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

उच्च स्तरीय जांच की तैयारी

वहीं, लापरवाह अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर फील्ड स्टाफ को दफ्तरों में बिठाया। सूत्रों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर जांच की तैयारी की जा रही है। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है