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World Arthritis Day: भारत में 18 करोड़ मरीज हैं आर्थराइटिस से पीड़ित, यूपी है नंबर एक पर

भारत में 18 करोड़ लोग आर्थराइटिस की बीमारी से पीडित हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में है। प्रदेश की कुल आबादी के 20 फीसदी लोग आर्थराइटिस से पीडित हैं।

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jiva

भारत में 18 करोड़ मरीज हैं आर्थराइटिस से पीड़ित, यूपी है नंबर एक पर

नोएडा। भारत में 18 करोड़ लोग आर्थराइटिस की बीमारी से पीडित हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में है। प्रदेश की कुल आबादी के 20 फीसदी लोग आर्थराइटिस से पीडित हैं। यह बीमारी आमतौर पर 50 वर्ष की उम्र के बाद होती थी, लेकिन अब 20 से 25 वर्ष के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। तनाव के कारण भी लोग इस बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। मोबाइल फोन भी इस बीमारी के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। यह जानकारी गुरुवार को सेक्टर-62 में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में जीवा आयुर्वेद के डायरेक्टर डॉ. प्रताप चौहान ने दी।

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जीवा आयुर्वेद के डायरेक्टर डॉ. प्रताप चौहान ने बताया कि पिछले दशक में आर्थराइटिस व जोड़ों से सम्बन्धित परेशानियां तेजी से बढ़ी हैं। 20-25 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। जबकि पहले यह बीमारी 50 वर्ष के बाद ही होती थी। डॉ. चौहान ने बताया कि आर्थराइटिस की बीमारी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक पाई जा रही है। देश की 58 फीसदी महिलाएं किसी न किसी प्रकार की जोड़ों की तकलीफ से पीडित हैं।

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उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के इलाज से इस परेशानी से बचा जा सकता है। प्रतिवर्ष आर्थराइटिस, गाउट, स्पॉन्डिलाइटिस व जोड़ों से सम्बन्धित लाखों मामले सामने आते हैं। उन्होंने दावा किया कि विशेष उपचार, औषधियों, खानपान तथा जीवनशैली में सुधार द्वारा जीवा आयुर्वेद अब तक हजारों रोगियों का सफल इलाज कर चुकी है।

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उन्होंने बताया कि जीवा आयुर्वेद में आर्थराइटिस के 1,67,461 रोगियों को परामर्श दिया गया, जिनमें से 27प्रतिशत रोगियों को पूरा आराम मिल गया, जबकि अन्य 27 फीसदी रोगियों ने अत्यधिक सुधार की जानकारी दी। यह 'जीवा आयुनिक सिस्टम' से संभव हो पाया।

जीवा आयुर्वेद के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरुण गुप्ता ने बताया कि आर्थराइटिस के आयुर्वेद उपचार में रोग के मूल कारण की चिकित्सा की जाती है, जिससे उसे स्थायी लाभ मिलता है। भारत में 18 करोड़ लोग आर्थराइटिस से पीडित हैं। इस मामले में उत्तर प्रदेश अव्वल है। उत्तर प्रदेश की कुल आबादी के 20 प्रतिशत लोग इस बीमारी से पीडित हैं। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र 12 प्रतिशत, तीसरे नंबर पर हरियाणा, चौथे पर पंजाब और पांचवें नंबर पर मध्य प्रदेश है।

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डॉ. गुप्ता ने बताया कि वर्ष-1950 में यह बीमारी 50 या उससे अधिक की उम्र में होती थी, लेकिन 2018 में यह पाया गया कि अब 20 से 25 वर्ष की उम्र के युवा भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से पीडित लोगों की संख्या के मामले में दुनिया में भारत दूसरे नंबर पर है।

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