
इस छोटी शीशी ने बदल दी 50 लाख किसानों की किस्मत
गाजियाबाद। एक बार फिर दिल्ली एनसीआर में पराली के जलाने के बाद फैलने वाले प्रदूषण का मामला गरमाता जा रहा है। लेकिन हर साल पराली की आने वाली समस्या के निजात के लिए गाजियाबाद के राष्ट्रीय जैविक कृषि केंद्र में वेस्ट डीकंपोजर विकसित किया गया है। जिसका प्रयोग कर किसान पराली की समस्य को जलाने की जरुरत नहीं पड़ेगी और किसान पराली को प्रयोग खाद के रुप में इस्तेमाल कर सकेंगे।
दरअसल राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र गाजियाबाद में वेस्ट डीकंपोजर विकसित किया गया है। इसकी कीमत मात्र 20 रुपये है। यह एक जैविक तरह पदार्थ के रुप में है। जिसे किसान एक बार खरीद कर ताउम्र प्रयोग कर सकते है। जानकारी के मुताबिक वर्तमान में करीब 50 लाख किसान इसका प्रयोग कर पराली से खाद बना रहे हैं। गाजियाबाद से रोजाना इस सेटंर से करीब 400 शीशीयां देश भर के किसानों को भेजी जा रही हैं। जिससे उन्हें भी फायदा हो सके।
मात्र 20रुपये की शीशी कमाल
वेस्ट डीकंपोजर तरल या कहें जेल की तरह शीशी में होता है। शीशी से भरे तरल पदार्थ को मिला कर एक बार में 200 लीटर घोल तैयार किया जा सकता है। इस घोल में अति सूक्ष्म जीवाणु होते हैं। जो काफी असर करत हैं। अगर शीशी खाली हो गई है तो तैयार घोल को फिर से शीशी में भर लें अगली बार इससे फिर उतना ही घोल तैयार किया जा सकता है। ये प्रकिया हर बार अपना कर किसान घोल भी तैयार कर सकते हैं और फिर भर कर रखने के बाद अगली बार फिर उस शीशी से घोल तैयारी कर सकते हैं।
कैसे करें तैयार-
सबसे पहले करीब 200 लीटर पानी में किलो गुड़ घोल लें इसके बाद इसमें शीशी का तरल पदार्थ यानी वेस्ट डीकंपोजर मिला दें। शीशी में तरल पदार्थ के जीवाणु गुड़ से मिली खुराक से हरकत में आ जाते हैं। गर्मी के मौसम में छह दिन रखने पर घोल छिड़कने को तैयार हो जाता है। इसे पराली पर छिड़का करने के बाद वह खाद में तब्दील होने लगती है। वेस्ट डीकंपोजर खेत में पड़ी पराली को 20 दिन में खाद बना देता है।
खेतों में कैसे करें प्रयोग
राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र, गाजियाबाद के सहायक निदेशक जगत सिंह ने बताया कि पराली में जीवाश्म कार्बन और सेल्यूलोस भरपूर होता है। इसको प्रयोग में लाने के लिए खेत मे पराली पड़ी हो, उसे पहले जोतना पड़ता है ताकि पराली पूरी तरह मिट्टी के संपर्क में आ जाए। फिर प्रति एकड़ वेस्ट डीकंपोजर से बना 500 लीटर घोल खेत में डालना होता है। ऐसा करने के बाद 20 दिन तक खेत को खाली छोड़ना होता है। जीवाणु पराली को अपना भोजन बना लेते हैं। उसमें से सेल्यूलोस चट कर जाते हैं। जीवाश्म कार्बन को सोख लेते हैं। इससे पराली का बाकी बचा हिस्सा सड़ कर खाद में तब्दील हो जाता है। वेस्ट डी डीकंपोजर राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र के सभी रीजनल स्टोर पर उपलब्ध है।
Updated on:
12 Oct 2018 11:19 am
Published on:
12 Oct 2018 11:19 am
