
नोएडा। फेफड़ों के रोग से पीड़ित पांच साल की मासूम बच्ची की जिंदगी की सांसे आखिरकार दमघोटू प्रदूषण ने छीन ली। इस मामले में जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर भी बड़ी लापरवाही किए जाने का आरोप लगा है। अस्पताल की सीएमएस अब एक कमेटी बनाकर सारे मामले की जांच करने की बात कह रही हैं। लेकिन इस कमेटी का जांच का फैसला चाहे जो भी हो एक मां को उसकी बच्ची की सांसे नहीं लौटा पाएगा।
अपनी पांच वर्षीय मृत बेटी नंदिनी को आगोश में लेकर बिलख रही सुनीता बाल्मीकि का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उसकी बेटी की मौत हुई है। सुनीता का कहना है कि वह सुबह अपनी बेटी को सर्दी जुकाम की शिकायत होने पर इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल आई थी। एक घंटे लाइन लग कर पर्ची भी बनवाई और कमरा नंबर 151 डॉक्टर को भी दिखाया। डॉक्टर ने देखने के बाद एक्स-रे करा कर लाने को कहा। जब वह एक्स-रे डॉक्टर के पास उनके कमरे में दिखाने पहुंची तो डॉक्टर सीट पर नहीं मिले। पूछने पर बतया गया की मीटिंग में गए हैं।
2 घंटे तक लाइन में खड़े होकर डॉक्टर का इंतजार करती रही, बेटी की हालत बिगड़ने पर वहां तैनात गार्ड से डॉक्टर को बुलाने का अनुरोध किया। उसने भी धक्का देकर, बाद मे आने की बात काही। लाइन में खड़े-खड़े उसकी बेटी ने उसकी बाहों में दम तोड़ दिया। बेटी की मौत के बाद सुनीता ने जब हंगामा किया। अस्पताल के प्रबंधन ने आनन फानन में बच्ची को इमरजेंसी में ले जाकर इलाज करने का दिखावा करना शुरू किया और फिर थोड़ी देर बाद घोषित कर दिया की बच्ची के दोनों से फेफड़े खराब होने के कारण उसकी मौत हुई है।
अपनी पांच साल की बच्ची की मौत ने सुनीता और उसके पति को गहरे सदमे में डाल दिया। उनके साथ आए और लोगों ने जब हंगामा किया तो प्रबंधन ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने आकर मामले को शांत किया। सीएमएस शिवम वंदना शर्मा ने इस सारे मामले की एक कमेटी बनाकर जांच करने की बात कही है। सीएमएस वंदना शर्मा ने भी स्वीकार करती हैं, कि बच्ची की मौत दोनों फेफड़े खराब होने के कारण हुई है। वह कहती हैं कि अगर जांच में डॉक्टरों की लापरवाही की बात सामने आई तो जरूर उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।
Updated on:
06 Nov 2019 09:55 am
Published on:
06 Nov 2019 09:53 am
