
नोएडा. ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) कांग्रेस (Congress) से इस्तीफा देकर भाजपा (BJP) में शामिल हो गए हैं। इसके साथ ही सबसे बड़ी दिलचस्प बात यह है कि पार्टी ज्वाइन करते ही उन्हें राज्यसभा (Rajyasabha) का टिकट भी दे दिया गया है। बता दें कि भाजपा में यह पहली बार नहीं है, जब किसी अन्य दल के नेता को पार्टी में शामिल करते ही राज्यसभा का टिकट दिया गया है। इससे पहले भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा (Jayaprada) को शामिल करने के करीब छह घंटे बाद रामपुर (Rampur) से लोकसभा प्रत्याशी घोषित किया गया था। इस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जयाप्रदा के रिकाॅर्ड को तोड़ दिया है।
गौरतलब है कि कांग्रेस के बागी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की उपस्थिति में पार्टी में शामिल करते ही उन्हें राज्यसभा का टिकट दिया गया है। इससे पहले वर्ष 2004 व 2009 में रामपुर से सांसद रह चुकी अभिनेत्री जयाप्रदा को भाजपा में शामिल करते हुए केवल छह घंटे के भीतर ही रामपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया गया था। हालांकि जयाप्रदा लोकसभा चुनाव में कुछ खास कमाल नहीं कर सकी थीं। उन्हें सपा के कद्दावर नेता आजम खान के सामने हार का मुंह देखना पड़ा था। अब देखने वाली बात यह होगी कि लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में आकर क्या कमाल करते हैं।
वेस्ट यूपी से एक भी सीट दिलाने में कामयाब नहीं हो सके थे सिंधिया
बता दें कि कांग्रेस के तत्कालीन महासचिव रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को लोकसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी की कमान सौंपी गई थी, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस को वेस्ट यूपी से एक भी सीट दिलाने में कामयाब नहीं हो सके। साथ ही वह उस दौरान सक्रिय भी नजर नहीं आए थे। इतना ही नहीं वे मध्यप्रदेश की गुना सीट भी हार गए थे। लोकसभा चुनावों में फेल हुए सिंधिया अब भाजपा के लिए क्या करिश्मा कर पाते हैं। इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
दो बार सांसद रह चुकी हैं जयाप्रदा
वहीं, फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा 2004 व 2009 में रामपुर लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं। दोनों ही बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी बेगम नूर बानो को करारी शिकस्त दी थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर उन्हें आजम खान के सामने हार का सामने कराना पड़ा था। बता दें कि इससे पहले 1994 में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव जयाप्रदा को तेलगु देशम पार्टी में लाए थे। इसके बाद जयाप्रदा रामाराव का साथ छोड़ चन्द्रबाबू नायडू गुट में शामिल हो गईं। इसके बाद चन्द्रबाबू से भी उनके मतभेद हुए तो वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गई थीं।
Published on:
12 Mar 2020 11:48 am
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