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दर्द से तड़प रही मह‍िला को हॉस्प‍िटल से भगाया, बाहर जाते ही हुर्इ बेहोश

नोएडा के जिला अस्पताल में डॉक्टर ने बीमार महिला की जांच किए बिना ही किया चलता

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नोएडा

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lokesh verma

Jan 17, 2018

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नोएडा. यूपी के शो विंडो कहे जाने वाले हार्इटेक शहर नोएडा के जिला अस्पताल में चाहे कितनी भी सुविधाएं दिए जाने के दावे किए जाते हों, लेकिन यहां इलाज पाने के लिए किस तरह परेशान होना पड़ता है। इसका एक उदाहरण मंगलवार को देखने को मिला। जब दर्द से तड़प रही एक महिला को डाॅक्टरों ने आेपीडी से दवा देकर चलता कर दिया। मजबूरन दवा लेकर जा रही महिला दर्द आैर बुखार की वजह से अस्पताल परिसर में ही बेहोश हो गर्इ। जिसके बाद वहां मौजूद अस्पताल के अन्य कर्मचारियों ने उसे डाॅक्टरों से निवेदन कर भर्ती कराया। जिसके बाद महिला को इलाज नसीब हो पाया।

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दिल्ली के न्यू अशोक नगर की रहने वाली सुनीता मंगलवार को बुखार और पेट में दर्द की शिकायत लेकर जिला अस्पताल पहुंची थी। यहां वह जैसे तैसे पर्चा बनवाकर आेपीडी में डाॅक्टरों को अपना हाल सुनाते हुए भर्ती करने की गुहार लगा रही थी। सुनीता ने बताया कि डाॅक्टरों ने उसकी जांच किए बिना ही दवा लिख दी। इतना ही नहीं डॉक्टर ने बीमारी क्या है इसके बारे में भी नहीं पूछा। जब वह डॉक्टर को कुछ कहने लगी तो गार्ड ने उसे कहा कि जल्दी कमरे से बाहर जाओ। सुनीता ने बताया कि वह खड़ी तक नहीं हो पा रही थी। इसलिए अस्पताल परिसर में प्रोजेक्ट रूम के बाहर आकर खड़ी हो गर्इ।

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अचानक बेहोश होकर गिर गर्इ

सुनीता ने बताया कि गार्ड के भगाने पर वह अोपीडी गेट से मजबूरन दर्द में कराहते हुए घर जाने के निकली ही थी। इसी दौरान अस्पताल परिसर में ही प्रोजेक्ट रूम के सामने अचानक बेहोश होकर गिर गर्इ। इस पर प्रोजेक्ट रूम से निकले कर्मचारियों व सुरक्षा कर्मियों ने मुझे इमरजेंसी में लाकर भर्ती कराया। महिला को भर्ती कराने वाले कर्मचारियों ने बताया कि महिला रूम के बाहर बेहोशी की स्थिति में पड़ी थी। एेसे में उसे इमरजेंसी में लेकर आए और भर्ती कराया। इमरजेंसी के स्टाफ ने बताया कि महिला को पेट में दर्द और उल्टी हो रही थी। खड़े होने में भी दिक्कत हो रही थी। इमरजेंसी में महिला को ग्लूकोज चढ़ाया गया। इसके बाद महिला की तबीयत में सुधार होने पर छुट्टी दे दी गई। वहीं महिला के साथ कोई अस्पताल नहीं आया था। इस संबंध में जब अस्पताल के प्रशासन के अधिकारियों से बात की गर्इ तो उन्होंने बताया कि इस तरह का मामला संज्ञान में आया है। दोबारा से ऐसा ना हो इसके लिए ओपीडी के सभी डॉक्टरों से बात की जाएगी। मरीजों को इलाज देना हमारी प्राथमिकता है।

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