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Raksha Bandhan 2019: भूलकर भी भाई को आज इस समय नहीं बांधे राखी, हो सकता है अनर्थ

खास बातें- Raksha Bandhan पर राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त 19 साल बाद बना चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का संयोग शास्त्रों के अनुसार राहुकाल में भाइयों की कलाई पर राखी बांधना उचित नहीं

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नोएडा

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lokesh verma

Aug 15, 2019

नोएडा. 15 अगस्त यानी आज रक्षाबंधन का त्यौहार है। बता दें कि भाई-बहन के अटूट रिश्ते और प्यार का पर्व रक्षाबंधन 19 साल बाद स्वतंत्रता दिवस के साथ मनाया जाएगा। इस त्यौहार पर बहनें भाईयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करेंगी। वहीं भाई बहनों को रक्षा करने करने का संकल्प लेंगे। पंडित चंद्रशेखर शर्मा कहते हैं कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्राकाल का असर नहीं रहेगा। इसलिए सूर्योदय से सूर्यास्त तक किसी भी समय बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांध सकती हैं।

पंडित चंद्रशेखर शर्मा बताते हैं कि रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का संयोग 19 साल बाद बना है। हमेशा की तरह इस बार बहनों को भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने के लिए किसी मुहूर्त का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। पूरे दिन किसी भी समय राखी बांधी जा सकती है।

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राखी बांधने का शुभ समय

पंडित जी का कहना है कि 15 अगस्त को सुबह 5 बजकर 49 मिनट से शाम 6 बजकर 01 मिनट तक बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। इस तरह राखी बांधने के लिए 12 घंटे 58 मिनट का समय मिलेगा। वह कहते हैं कि राहुकाल में भाइयों की कलाई पर राखी बांधना उचित नहीं होता। इसलिए 2:03 से 03:41 बजे तक राहुकाल में रक्षासूत्र नहीं बांधें।

इसलिए भद्रा काल में नहीं बांधते राखी

उन्होंने बताया कि भद्रा का समय भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांधी जाती है। भद्राकाल के दौरान राखी बांधना अशुभ माना जाता है। पंडित जी बताते हैं कि भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन है। इसलिए जिस प्रकार शनि का स्वभाव क्रूर और क्रोधी माना जाता है, उसी तरह से भद्रा का भी स्वभाव माना जाता है। भद्रा के स्वभाव के चलते ब्रह्माजी ने उन्हें पंचाग के एक प्रमुख अंगकरण में स्थान दिया। पंचाग में इन्हें विष्टीकरण के नाम से जाना जाता है। दिन विशेष पर भद्राकरण लगने से शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। वहीं यह भी कहा जाता है कि रावण की बहन ने भद्राकाल में ही राखी बांधी थी, जिस कारण रावण का सर्वनाश हुआ था।

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