
नोएडा।अलीगढ़ में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी द्वारा चलाए जा रहे मदरसे में हिंदू व मुस्लिम छात्र एक साथ ओम और अल्लाह का उच्चारण करते हैं। इस मदरसे में लगभग 4000 बच्चे पढ़ते हैं। इस मदरसे की छात्रा का कहना है कि ओम शब्द के उच्चारण से उनको शांति मिलती है और अल्लाह शब्द के उच्चारण से ऐसा लगता है कि जैसे सारे काम हो गए। इस मदरसे में ओम व अल्लाह शब्द का एक साथ उच्चारण करना देवबंदी उलेमाओं को नागवार गुजरा है। उन्होंने इस पर कहा है कि आपका मजहब आपको मुबारक, हमारा मजहब हमें मुबारक।
यह कहा देवबंदी उलेमा ने
देवबंदी उलेमा अशरफिया मदरसे के मोहतमिम सालिम अशरफ कासमी ने कहा, इस समय हिंदुस्तान में जश्न-ए-जम्हूरियत चल रहा है। इसका मतलब यह है कि हर कोई अपने मजहब के हिसाब से इस हिंदुस्तान में सिर उठाकर फक्र के साथ जी सकता है। दूसरे के रस्मों और रिवाज को अपने मजहब में शामिल करना और उसको दिखाना, इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है। उन्होंने कहा, सलमा अंसारी मदरसों में ओम का उच्चारण करा रही हैं, हमारे मजहब में इसकी इजाजत नहीं है इसलिए हम एक अल्लाह को मानते हैं। चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों ना हो।
ऐसे नहीं बढ़ेगी मोहब्बत
उन्होंने सलमा अंसारी को नसीहत देते हुए कहा कि ऐसा करने वाले को सच्ची तौबा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ऐसे लोगों को और वसीम रिजवी जैसे लोगों को भी कहना चाहता हूं कि हिंदू भाइयों के रिवाजों को अपनाने से आपस में मोहब्बत नहीं बढ़ेगी। मोहब्बत तो बढ़ती है, आपसी भाईचारे से और आपस में एक-दूसरे के काम आने से। मैं अगर किसी हिंदू को मस्जिद में बुलाऊं और कहूं कि यहां नमाज पढ़ो तो हिंदू क्या नमाज पढ़ेगा। यह क्या बात हुई कि मदरसों में आप ओम पढ़ाने लगे तो मदरसों को मंदिर ही बना देना चाहिए, इसलिए सलमा अंसारी को इस तरह की हरकतों से बचना चाहिए।
मदरसा मजहब की तालीम के लिए होता है
वहीं, मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है मदरसा असल मजहब की तालीम के लिए होता है। अगर कोई मदरसा ऐसी बातें और ऐसे नारे लगवाता है, जिससे दूसरे मजहब की जानकारी होती है, तो यह अलग मसला होगा। इसकी गुंजाइश नहीं होगी ।
Published on:
26 Jan 2018 12:17 pm
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