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यूपी का पहला एयर पॉल्यूशन कंट्रोल टावर हुआ शुरू, जानें खासियत और कैसे करेगा हवा को शुद्ध

नोएडा प्राधिकरण ने भेल के साथ मिलकर प्रदूषण को थामने के लिए प्रदेश का पहला एयर पॉल्यूशन कंट्रोल टावर स्थापित कर लोगों को राहत देने का काम किया है। इस एयर पोल्यूशन कंट्रोल टावर का उद्घाटन बुधवार को भारी उद्योग मंत्री महेंद्र नाथ पांडे और राज्यमंत्री विद्युत और श्रीकृष्ण पाल गुर्जर ने किया।

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नोएडा

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lokesh verma

Nov 18, 2021

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नोएडा. एनसीआर में प्रदूषित हवा और स्मॉग के कारण शहर की सांस थमने लगी है। साथ ही सांस और अस्थमा के मरीजों की अस्पतालों में लाइनें लगने लगी हैं। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण ने भेल के साथ मिलकर प्रदूषण को थामने के लिए प्रदेश का पहला एयर पॉल्यूशन कंट्रोल टावर स्थापित कर लोगों को राहत देने का काम किया है। इस एयर पोल्यूशन कंट्रोल टावर का उद्घाटन बुधवार को भारी उद्योग मंत्री महेंद्र नाथ पांडे और राज्यमंत्री विद्युत और श्रीकृष्ण पाल गुर्जर ने किया। एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सेक्टर-16 फिल्म सिटी और डीएनडी के बीच हरित क्षेत्र की जमीन पर स्थापित यह टावर से एक किलो वर्ग मीटर में हवा को शुद्ध करेगा।

नोएडा क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वायु प्रदूषण नियंत्रण टावर डीएनडी के पास सेक्टर-16 ए में ग्रीन बेल्ट पर लगभग 400 वर्गमीटर जमीन पर स्थापित किया गया है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे एवं डीएनडी फ्लाईवे शहर का मुख्य मार्ग है, जिस पर यातायात का घनत्व अधिक होता है। इस कारण वाहनों से प्रदूषण का उत्सर्जन अत्यधिक होता है। वायु प्रदूषण नियंत्रण टावर स्थापित किए जाने से एक वर्ग किलोमीटर सेक्टर-16, 16ए, 16 बी, 17, 17 ए, 18, डीएनडी, नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेस वे क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। इस मौके पर भारी उद्योग मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा यह हमारे भारी उद्योग इकाई भेल द्वारा शुरू किया गया है। यह नोएडा और आसपास के लोगों के लिए अच्छी पहल है।

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ऐसे कार्य करेगा वायु प्रदूषण नियंत्रण टावर

उल्लेखनीय है कि नोएडा एनसीआर में प्रत्येक वर्ष ठंड बढ़ते वायु की गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर जाती है, जिसके कारण जनमानस को अत्यधिक असुविधा का सामना करना पड़ता है। सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन के ऑक्साइड (No2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) इत्यादि मिलकर वायु को प्रदूषित करते हैं। इस समस्या के निराकरण के लिए वायु प्रदूषण नियंत्रण टावर की स्थापना जरूरी है। वायु प्रदूषण नियंत्रण टावर बड़े पैमाने पर हवा को साफ करने के लिए डिजाइन की गई संरचना है। प्रदूषित हवा के टावर में प्रवेश करने के बाद इसे वातावरण में पुनः छोड़ने से पहले कई परतों द्वारा साफ किया जाता है। वायु प्रदूषण नियंत्रण टावर को बड़े पैमाने पर वायु शोधक के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।

भेल ने अपने खर्चे पर लगाया

यह टावर भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के हरिद्वार प्लांट में तैयार किया गया है। टावर को भेल ने स्वयं के खर्चे पर स्थापित किया है। इसके संचालन में हर साल करीब 37 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। नोएडा प्राधिकरण इस खर्चे का 50 फीसद वहन करेगा।

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