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सरकार को अर्थव्यवस्था पर मिलेगी निष्पक्ष राय

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर मात्र 5.7 फीसदी रह गई जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 7.1 प्रतिशत थी

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Sunil Sharma

Oct 10, 2017

economics

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- केवल खन्ना, अर्थशास्त्री

क्रेडिट साइकल, निजी निवेश में गिरावट तथा बैड लोन से जूझते बैंकिंग क्षेत्र को देखते हुए आर्थिक सलाहकार परिषद के लिए ऐसी सिफारिशें तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं है, जो जीडीपी को पंख लगा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था की बिगड़ी चाल को पटरी पर लाने के प्रयासों के तहत प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) में पुनर्गठन किया गया है। यह पुनर्गठन ऐसे समय किया गया है जब अर्थव्यवस्था जीएसटी और नोटबंदी के बाद मुश्किल दौर से गुजर रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर मात्र 5.7 फीसदी रह गई जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 7.1 प्रतिशत थी। तीन साल की अवधि में आर्थिक विकास की यह सबसे धीमी गति रही है।

प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद एक असंवैधानिक निकाय है। इसका गठन प्रधानमंत्री को आर्थिक सलाह मशविरा देने के लिए किया जाता है। अर्थव्यवस्था पर मंडराते संकट के बीच पीएमईएसी का पुनर्गठन आर्थिक मामलों पर निष्पक्ष नजरिए की आवश्यकता पर बल देता है। सलाहकार परिषद के तौर पर कार्य करने वाली पीएमईएसी आर्थिक विकास व ट्रेंड पर मासिक रिपोर्ट भी तैयार करती है। इसके लिए परिषद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विकास व ट्रेंड्स पर बारीकी से नजर रखते हुए समुचित नीति निर्धारण के सुझाव तैयार कर प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करती है। साथ ही यह अर्थव्यवस्था पर समीक्षा रिपोर्ट भी प्रस्तुत करती है।

एक ओर, जीएसटी के परिणाम स्वरूप व्यापारी वर्ग 95,000 करोड़ रुपए की प्राप्ति के मुकाबले 65,000 करोड़ रुपए के कर का दावा कर रहा है। दूसरी ओर, क्रेडिट साइकल, निजी निवेश में गिरावट तथा बैड लोन से जूझते बैंकिंग क्षेत्र को देखते हुए आर्थिक सलाहकार परिषद के लिए ऐसी सिफारिशें तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा, जो जीडीपी को पंख लगा सके। इस बीच सरकार की अपनी ही पार्टी में आर्थिक सुधारों को लेकर विरोध के स्वर उठ रहे हैं। ऐसे में पीएमईएसी का पुनर्गठन एक स्वागत योग्य कदम कहा जा सकता है, क्योंकि सरकार को आर्थिक चुनौतियों पर निष्पक्ष राय मिलनी बेहद जरूरी है।

आर्थिक नीतियों के क्रियान्वयन से अर्थव्यवस्था और जनता व्यापक तौर पर प्रभावित होते हैं। समय-समय पर सुधार और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन से अर्थव्यवस्था में खोया विश्वास लौटाने में काफी हद तक सफलता मिल सकती है। और, फिर नीति आयोग ने हाल ही अर्थव्यवस्था को लेकर जताई जा रही चिंताओं को नकारते हुए बताया है कि देश की ऑटो इंडस्ट्री में 8 फीसदी विकास है और सीमेंट की बिक्री में भी वृद्धि हुई है। अर्थव्यवस्था में सुधार और आर्थिक सलाहकार परिषद के लिए आवश्यक है कि भावी घरेलू विकास के आंकड़ों पर आशावादी रवैया अपनाया जाए।