
Expert Comment on Budget 2022
प्रो. सी.एस. बरला
(कृषि अर्थशास्त्री, विश्व बैंक और योजना आयोग से संबद्ध रह चुके हैं)
Expert Comment on Budget 2022: देश में आर्थिक विषमता बहुत ज्यादा है। क्षेत्रीय विषमता की स्थिति भी गंभीर है। केंद्र सरकार ने बजट- 2022-23 में इस समस्या की तरफ खास ध्यान नहीं दिया। आम व्यक्ति, विशेषकर मध्यवर्ग का जीवनयापन काफी कठिन हो गया है। रसोई गैस, डीजल व पेट्रोल की बढ़ी कीमतों ने परिवारों के बजट को बिगाड़ दिया है।
देश की जनता को केंद्र्र तथा राज्य सरकारों के बजट प्रस्तावों के प्रति उत्सुकता और आशा होती है। गत दो वर्षों में कोरोना ने जहां करोड़ों लोगों को रोजगार से वंचित किया, वहीं आम नागरिकों को टीकाकरण के माध्यम से सुरक्षा चक्र भी मिला। इसका सकारात्मक प्रभाव नजर आया। जहां तक बजट का प्रश्न है, केंद्रीय वित्त मंत्री को अनेक समस्याओं से जूझते हुए बजट बनाना पड़ता है। सीमा पार के आतंंक के मद्देनजर जहां प्रतिरक्षा को ध्यान में रखना जरूरी है, वहीं साधन जुटाने के लिए करों में वृद्धि की भी एक सीमा है।
बजट से एक दिन पूर्व आर्थिक समीक्षा 2021-22 को लोकसभा के पटल पर रख दिया गया। इसमें कई ऐसी बाते हैं जिन पर देश को गर्व हो सकता है। जब देश की अर्थव्यवस्था की समीक्षा की जाती है तब उन बिन्दुओं को भी देखना उपयुक्त होता है, जो अब तक उपेक्षित रहे हैं। विश्व के 116 देशों के भुखमरी सूचकांक में भारत का 101वां स्थान है। सुप्रीम कोर्ट भी भारत सरकार को देश में भूख से मरने वालों की संख्या का आकलन करने को कह चुका है। पोषाहार की दृष्टि से भी भारत की स्थिति संतोषप्रद नहीं है। सरकार कृषकों की आय को तीन वर्ष में दोगुना करना चाहती है। मुश्किल यह है कि अनाज, दालों, फल व सब्जियों के भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण किसान की 20 से 35 प्रतिशत फसल नष्ट हो जाती है। कोविड के कारण अनेक राज्यों से श्रमिकों का पलायन हुआ। आज भी करोड़ों श्रमिक देश में बेरोजगार बैठे हैं। खुदरा महंगाई 6 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
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ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट (2021) में बताया गया है कि भारत में सरकारी नीतियों के कारण जहां धन कुबेरों की सम्पत्ति, तथा उनकी संख्या में वृद्धि हुई है, गरीबों की संख्या तथा गरीबी के स्तर में भी वृद्धि हुई है। इस समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है। देश में बहुत अधिक क्षेत्रीय विषमताएं हैं, जिन्हें कम करने के लिए केंद्र सरकार को नीतियां बनानी चाहिए। उपरोक्त सभी अपेक्षाओं के अनुरूप कोई खास प्रस्ताव वित्तमंत्री के बजट में शामिल नहीं हुआ। न व्यक्तिगत करों में कोई बदलाव हुआ और न ही जीएसटी की दरों में कोई कमी की गई। वित्त मंत्री के बजट में तीन अच्छी बातें हैं। एक, पूंजीगत व्यय में 35त्न वृद्धि की घोषणा की गई है। दो, आम जनता के लिए किसी भी प्रत्यक्ष या परोक्ष कर में कोई वृद्धि नहीं की गई है। तीन, तटकर तथा उत्पादन करों में जरूरत के हिसाब से न्याय संगत प्रावधान किए गए हैं।
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Published on:
02 Feb 2022 08:55 am
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