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नरसंहार सबसे जघन्य अंतरराष्ट्रीय अपराधों में से एक है। इसमें नस्ल, जातीयता, राष्ट्रीयता या धर्म के आधार पर लोगों के किसी समूह को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट किया जाता है। यह न केवल उस समूह की पहचान मिटाता है, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आने वाले ऐसे आघात भी छोड़ जाता है, जो मानवता पर स्थायी घाव बन जाते हैं। मुझे इस बात का गहरा दुख है कि मुझे यह कहना पड़ रहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित बहुपक्षीय व्यवस्था इस नरसंहार को रोकने में विफल रही है। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम साबित हुई है।
7 अक्टूबर 2025 को दक्षिणी इजराइल में फिलिस्तीनी लड़ाकों के उस क्रूर हमले के दो वर्ष पूरे हुए, जिसमें 1200 इजराइली और विदेशी नागरिक मारे गए थे। यह तारीख उस समय की भी याद दिलाती है, जब इजराइल ने फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ उनके इतिहास का निर्मम, लंबा व व्यापक हमला शुरू किया था। युद्धविराम और बंधकों एवं कैदियों की रिहाई से उम्मीद जरूर जगी है, पर इससे पहले हो चुकी तबाही को मिटाया नहीं जा सकता। यहां हजारों लोगों की जान जा चुकी है और पूरे-के-पूरे परिवार मिट गए हैं।गाजा पट्टी खंडहरों में तब्दील हो चुकी है और वहां जीवन लगभग असंभव हो गया है। फिलिस्तीनी और इजराइली लोगों के मन पर लगे घावों की गूंज कई पीढिय़ों तक सुनाई देगी। हमें एक पीड़ादायक सच्चाई को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पिछले दो वर्षों में इजराइली सरकार की कार्रवाइयां लगातार एक ही भयावह उद्देश्य की ओर संकेत करती रही हैं- गाजा में फिलिस्तीनियों के जीवन का व्यवस्थित विनाश। गाजा में फिलिस्तीनियों को एक समूह के रूप में नष्ट करने के विशिष्ट इरादे से नरसंहार के चार कृत्य किए जाने के लिए इजराइल राष्ट्र जिम्मेदार है। युद्धविराम से गाजा में इजराइल के क्षेत्रीय उद्देश्यों को लागू करने की प्रक्रिया भले ही फिलहाल रुक जाए, लेकिन गाजा पट्टी में किए गए क्षेत्रीय बदलाव अब तक पलटे नहीं गए हैं।
हमने पाया कि इजराइली अधिकारियों ने गाजा पर स्थायी सैन्य नियंत्रण स्थापित करने और उसकी जनसांख्यिकीय संरचना बदलने का स्पष्ट और लगातार बना रहने वाला इरादा प्रदर्शित किया है। गलियारों और बफर जोन में नागरिक बुनियादी ढांचे तथा आम लोगों के जीवित रहने के लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट कर दिया गया है। क्षेत्र को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया और फिलिस्तीनियों को जबरन दूसरी जगहों पर भेजा गया। इजराइली अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से आबादी को निर्वासित करने, बस्तियां बसाने और इस क्षेत्र का विलय करने की योजनाओं का समर्थन किया है। सदस्य देशों को सभी पीडि़तों के लिए न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की जांच में सहयोग करना चाहिए और अपने यहां सार्वभौमिक क्षेत्राधिकार के सिद्धांत का इस्तेमाल करते हुए स्वतंत्र जांच करनी चाहिए। मेरी अंतिम अपील संक्रमणकालीन न्याय को लेकर है। हाल के वर्षों में यह विचार लगभग असंभव-सा प्रतीत होने लगा है। हालांकि, अंतत: सत्य और मेल-मिलाप के माध्यम से ही शांति की जड़ें मजबूत हो सकती हैं। (गाजा में नरसंहार और जबरन विस्थापन को लेकर गठित जांच आयोग की अध्यक्ष के रूप में नवी पिल्लई का संयुक्त राष्ट्र महासभा की समिति में अक्टूबर 2025 में दिया गया वक्तव्य)
नवी पिल्लई
(नोबेल शांति पुरस्कार 2026 के लिए घोषित भारतीय मूल की विधिवेत्ता)
Updated on:
10 Oct 2026 07:04 pm
Published on:
10 Oct 2026 07:03 pm
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