18 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

संपादकीय: यात्री सुविधाओं की अनदेखी चिंताजनक

रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं में लापरवाही चिंता का विषय है। स्वच्छ पेयजल जैसी जरूरी सुविधा में कमी यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
2 min read
Google source verification
e coli in railway water cooler

e coli in railway water cooler

रेल का सफर चाहे लंबी दूरी का हो या छोटी दूरी का। यात्रियों को पीने के पानी की सदैव जरूरत रहती है। इसीलिए हर छोटे-बड़े स्टेशन पर यात्री प्लेटफॉर्म पर बने वाटर कूलर से पीने के पानी का इंतजाम करके सवारी गाड़ी में चढ़ते हैं। स्टेशनों पर ठहराव होते ही पहले से बैठे यात्रियों की दौड़ भी वाटर कूलर की तरफ होती है ताकि आगे के सफर के लिए पानी का बंदोबस्त हो सके। चिंता की बात यह है कि यात्रियों की इस सबसे बड़ी जरूरत के मामले में ही उनकी सेहत से खिलवाड़ होता दिख रहा है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट चौंकाने वाली है, जिसमें कहा गया है कि देश के कई बड़े रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलर के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है। इस रिपोर्ट से रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई और यात्रियों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है। वह इसलिए भी क्योंकि रिपोर्ट मेंकेवल पीने के पानी के दूषित होने की बात ही नहीं बल्कि रेलवे स्टेशनों पर शौचालयों की बदहाली का भी उल्लेख किया गया है। रेलवे स्टेशनों पर लगे वाटर कूलरों के पानी की जांच में जो बैक्टीरिया मिला है, वह लोगों को बीमार करने के लिए काफी है। ऐसे में यात्रियों के बीमारी मोल लेने का खतरा बढ़ गया है। जरूरी नहीं कि हर यात्री बोतलबंद पानी खरीदने की क्षमता रखता हो। रेलवे की जिम्मेदारी बनती है कि वह यात्रियों को पीने का साफ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराए। रेलवे स्टेशन पर खान-पान सामग्री तैयार करने वाली स्टॉलों पर भी इसी पानी का इंतजाम होता है। ऐसे में जो खाद्य सामग्री बन रही होगी वह भी गुणवत्ता के मापदंड पर कितनी खरी उतरेगी इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है। कैग की जांच रिपोर्ट तो महज ५१२ रेलवे स्टेशनों की ऑडिट के नतीजों पर आधारित है। इनमें से ४९८ स्टेशन न्यूनतम सुविधा मानकों पर भी खरे नहीं उतरे तो चिंता बढऩी स्वाभाविक है। हैरत की बात यह है कि इनमें से ५९ रेलवे स्टेशनों पर तो पानी की जांच तक नहीं की गई, जबकि पानी की गुणवत्ता जांच बंदोबस्त अनिवार्य होने संबंधी स्थायी आदेश पहले से ही लागू हैं।

सवाल सिर्फ पीने का पानी के साफ होने का ही नहीं है, रेलवे में आधुनिकीकरण के तमाम प्रयास उस समय मुंह चिढ़ाते नजर आते हैं, जब रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा संबंधी मूलभूत जरूरतों तक की अनदेखी नजर आती है। कहीं शौचालय गंदे रहते हैं तो कहीं यात्री प्रतीक्षालयों व प्लेटफॉर्म पर लोगों के बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं है। कैग की रिपोर्ट आने के बाद रेलवे का देश भर में बीस हजार स्थानों पर वाटर कूलरों में 'टैंक टू टैप' फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने का फैसला स्वागत योग्य है। जरूरत इस बात की है कि पानी की गुणवत्ता के साथ रेलवे की ओर से यात्रियों को दी जाने वाली दूसरी सुविधाओं की भी समयबद्ध जांच और सतत निगरानी की जाए। यात्री सुविधाओं की कहीं भी अनदेखी चिंताजनक है।