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‘सोल कैप’ पर प्रतिबंध और अश्वेत तैराकों के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया

अंतरराष्ट्रीय तैराकी संघ के फैसले पर चौतरफा कड़ी प्रतिक्रिया के बाद बयान जारी करना पड़ा है कि संस्था संबंधित उत्पादों के बारे में पुनर्विचार कर रही है

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Sunil Sharma

Jul 05, 2021

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- कैरेन अतिया, स्तम्भकार, वाशिंगटन पोस्ट

अंतरराष्ट्रीय तैराकी संघ (फिना) ने आगामी ओलंपिक खेलों में ‘सोल कैप’ पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय किया है। सोल कैप एफ्रो बालों के अनुरूप डिजाइन की गई टोपी है। फिना का कहना है कि ये टोपी सामान्य सिर पर फिट नहीं बैठती। सोल कैप के साथ साझेदारी करने वाली ब्रिटिश तैराक एलिस डियरिंग के ब्रिटेन की पहली अश्वेत महिला तैराक के तौर पर ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के कुछ ही दिन बाद यह फैसला आया है।

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फिना का कहना है कि उसका एक उद्देश्य विश्वव्यापी अभियान ‘तैराकी सबके लिए, तैराकी जीवन के लिए’ को प्रोत्साहित करना है। परन्तु इस फैसले से अश्वेत लोगों को संदेश जाता है कि तैराकी उनके लिए नहीं है, यह कि उनके घुंघराले बाल ‘सामान्य’ नहीं हैं। इसके बाद कई आक्रोशित तैराकों ने ट्विटर पर बताया कि बड़ी टोपी गति में ज्यादा अवरोध पैदा करती है। जबकि फिना का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पद्र्धाओं में भाग लेने वाले खिलाडिय़ों ने ऐसी टोपी कभी नहीं पहनी और इसकी जरूरत भी नहीं है। इन टोपियों की जरूरत अब तक इसलिए भी नहीं पड़ी क्योंकि अश्वेत खिलाडिय़ों की संख्या अत्यधिक नहीं थी। टोपी पर प्रतिबंध लगाने के फिना के प्रयास अतीत की रंगभेद नीति की याद दिलाते हैं। अमरीका में 1950 तक अश्वेतों के गोरे लोगों के साथ तैरने पर प्रतिबंध था। जब सार्वजनिक तालाब एकीकृत हो गए तो गोरे लोग अश्वेतों को पानी में उतरने से रोकने के हरसंभव उपाय करते। तालाब के तल में कीलें रखने से लेकर पानी में ब्लीच और एसिड तक डाल देते थे।

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इतिहासकार अमरीका में अश्वेतों को तैराकी से रोक जाने और अश्वेत बच्चों के तैराकी सीखने की कम दर में सीधा संबंध पाते हैं। अमरीका में 64 प्रतिशत अश्वेत बच्चों में तैराकी जानने का स्तर न के बराबर या बहुत कम है। ब्रिटेन में 95 फीसदी अश्वेत वयस्क और 80 फीसदी अश्वेत बच्चे तैराकी नहीं करते। अश्वेत महिलाओं और लड़कियों के तैराकी का सपना पूरा करने की बात की जाए तो समस्या और भी ज्यादा गहरी हो जाती है। मुझे सौभाग्य से तैराकी सीखने का मौका मिलास, लेकिन मुझे बिना किसी टोपी के मुझे तैराकी प्रतिस्पर्द्धा का खयाल ही छोडऩा पड़ा, जिसका मुझे आज भी पछतावा है। विशेष रूप से अश्वेत महिलाओं के लिए फिना का फैसला याद दिलाता है कि जितना अधिक अश्वेत, गोरों के प्रभुत्व वाले क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, उनके काले बालों को निशाना बनाए जाएंगे, जिनका उपचार भी अनचाहे स्पर्श से लेकर खेल से पहले बाल कटवाने के लिए सीधे-सीधे दबाव डालने जैसा पक्षपातपूर्ण है। बालों या खेल में से किसी एक के चुनाव के लिए बाध्य करना अपमानजनक है।

फिना के ऐसे फैसले केवल अश्वेत खिलाडिय़ों के ही खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उन अश्वेत उद्यमियों के लिए भी झटका है जो गोरों के प्रभुत्व वाले खेलों में अश्वेतों को आकर्षित करने का काम कर रहे हैं। चौतरफा कड़ी प्रतिक्रिया के बाद फिना ने कहा है कि ‘सोल कैप व संबंधित उत्पादों’ को लेकर फैसले की समीक्षा की जा रही है। दुनिया तो फिना सदस्यों से 100 मीटर की ओलंपिक स्टाइल बैकपैडलिंग में प्रशिक्षित होने की ही उम्मीद कर सकती है, वरना पक्षपात का गोल्ड मेडल तो संस्था ने अपने लिए पक्का कर ही लिया होता।