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Patrika Opinion : राष्ट्र के शत्रु हैं आपदा में मुनाफाखोरी करने वाले

शर्मनाक तथ्य है कि जब देश में महामारी से हर कोई जूझ रहा था, तब मुनाफाखोर अपना फायदा खोज रहे थे।
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नई दिल्ली

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Patrika Desk

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Updated: 30 Sep 2021, 7:46 AM IST

Patrika Opinion : राष्ट्र के शत्रु हैं आपदा में मुनाफाखोरी करने वाले

Patrika Opinion : राष्ट्र के शत्रु हैं आपदा में मुनाफाखोरी करने वाले

महामारी के समय देश में कुछ लोग मुनाफा कमाने के लिए मरीजों और उनके तीमारदारों से वसूली में जुटे हुए थे। मेडिकल सुविधाओं से लेकर दवाओं की कीमतों से कई गुना ज्यादा वसूली की गई। कई जगहों पर यह वसूली 500 गुना तक ज्यादा थी। यह तथ्य लोकल सर्किल के सर्वे में सामने आया है। सर्वे में शामिल लोगों ने बताया कि उन्होंने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल सुविधाओं के लिए कैसे ज्यादा कीमत चुकाई। चाइनीज ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की कीमत एक लाख तक वसूली गई, जबकि इसकी कीमत महज 30 से 35 हजार रुपए थी। हालांकि यह बात पहली बार सामने नहीं आई है।

शर्मनाक तथ्य है कि जब देश में महामारी से हर कोई जूझ रहा था, तब मुनाफाखोर अपना फायदा खोज रहे थे। बड़ा सवाल यही है कि क्या कुछ लोगों का धर्म आपदा में सिर्फ मुनाफा कमाना होता है? उनकी कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं रह जाती है? इसके लिए जिम्मेदार कौन है, सरकार या फिर हम खुद, जिन्होंने अपने आसपास ऐसा तानाबाना रच लिया है, जिसमें पैसा नैतिक मूल्यों पर भारी होता जा रहा है। तब हम मानवता को भूल जाते हैं और पैसे कमाने के अलावा कुछ नहीं सूझता। समाज में नैतिक मूल्यों का पतन तेजी के साथ हुआ है, लेकिन इस सबके बीच सरकारों की भूमिका क्या रह जाती है? क्या वे महामारी के समय अपनी भूमिका को सही तरीके से निभा पा रही थीं? अगर निभा रही होतीं, तो शायद मेडिकल सुविधाओं को उपलब्ध कराने को लेकर इस तरह की मुनाफाखोरी को रोका जा सकता था। दोषी लोगों के खिलाफ तत्काल सख्त कदम उठाए जा सकते थे, लेकिन ऐसा कुछ नजर नहीं आया।

अदालतों को भी कोरोना काल में अनेक मौकेे पर जनहित में सरकारों को कई निर्देश दिए। इसके बावजूद बाजार में जो कुछ हुआ, वह किसी से छिपा नहीं रहा। बेहतर होता कि सरकारें अपनी खामियों पर पर्दा डालने की बजाय उन लोगों को बेनकाब करतीं, जिन्होंने महामारी के समय खूब मुनाफाखोरी की। देश में आवश्यकता ऐसी रणनीति बनाने की है, जिसमें संकट की घड़ी में आमजन को राहत मिल सके। इसके लिए सरकारों को समय रहते सभी पहलुओं पर पहले से ही मंथन करना चाहिए, ताकि आपदा के दौरान कोई मुनाफाखोरी का गणित खोजता हुआ दिखाई न दे। मुनाफाखोरी को खत्म करना केंद्र और राज्य सरकारों की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसमें किसी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।