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सबसे अहम सवाल यह है कि क्या आरके स्टूडियो को बेचने का निर्णय सही है? क्या सरकार को इस स्टूडियो को संग्रहालय बनाने की पहल नहीं करनी चाहिए?

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Sunil Sharma

Aug 27, 2018

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भारतीय सिने जगत की पहचान और ग्रेट शो मैन राजकपूर का सपना आरके स्टूडियो बिक जाएगा। राजकपूर के मंझले पुत्र और मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर ने कहा है कि हमारे पिता का सपना अब परिवार के लिए सफेद हाथी बन गया है। इससे हमारी यादें जरूर जुड़ी हैं लेकिन परिवार में झगड़े का कारण बने, इससे पहले ही हमने इसे बेचने का फैसला कर लिया है। मुम्बई के चेंबूर इलाके में दो एकड़ में बने इस स्टूडियो में पिछले साल लगी आग में बॉलीवुड से जुड़ी तमाम बेशकीमती धरोहरें जिनमें नरगिस से लेकर ऐश्वर्या राय तक आरके की अभिनेत्रियों द्व्रारा पहनी गई पोशाकें, आभूषण और मेरा नाम जोकर में राजकपूर की ओर से पहना गया जोकर का मास्क और अन्य सामान जल कर राख हो गए थे। तभी से इस स्टूडियो में फिल्मों की शूटिंग बंद है।

सबसे अहम सवाल यह है कि क्या आरके स्टूडियो को बेचने का निर्णय सही है? क्या इसको स्मारक बनाए जाने की पहल सरकार को करनी चाहिए? सचमुच सरकार कोई ऐसा प्रयास करे या फिर आवारा (१९५१), श्री ४२० (१९५५), जागते रहो (१९५६), मेरा नाम जोकर (१९७०) तथा बॉबी जैसी फिल्मों के निर्माण का गवाह यह स्टूडियो एक रिहायशी सोसायटी या शॉपिंग मॉल में तब्दील हो जाने दिया जाए। देखा जाए तो आरके स्टूडियो मुंबई आने वाले पर्यटकों ही नहीं, माया नगरी में काम करने के लिए रोज पहुंचने वाले सैकड़ों युवाओं के लिए मंदिर से कम नहीं है। गेटवे ऑफ इंडिया, ताजमहल होटल, मुंबा देवी, वानखेड़े स्टेडियम की तरह आरके स्टूडियो भी मुंबई की पहचान है।

कपूर परिवार यदि इसे नहीं संभाल पा रहा तो राज्य सरकार को चाहिए कि वह उचित मुआवजा देकर इसका अधिग्रहण कर ले ताकि विश्व में हॉलीवुड के बाद सबसे अधिक लोकप्रिय बॉलीवुड की इस पहचान को संरक्षित रखा जा सके। किसी राजनेता के निधन पर उसके आवास को स्मारक बनाने का फैसला करने वाली सरकारों को इस दिशा में सोचना चाहिए। ये वे ही राजकपूर हैं जिन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार देने केे लिए राष्ट्रपति खुद मंच से उतर कर नीचे आए थे।

फिल्म जगत की पहचान बने इस स्टूडियो का पुररुद्धार कराकर इसे फिल्मों का संग्रहालय भी बनाया जा सकता है। यह भी होना चाहिए कि टाटा और अंबानी जैसे बड़े औद्योगिक घराने जिन्होंने मुंबई को आधुनिक बनाने के साथ इसके पुरा वैभव को भी संरक्षित रखने का काम किया है, वे भी इस स्टूडियो को बचाने में आगे आएं। यह सही है कि आजकल ज्यादातर फिल्मों की शूटिंग आउटडोर लोकेशनों पर होती है लेकिन इसके लिए इतिहास के पन्नों को फाडक़र फेंक तो नहीं देना चाहिए।

बॉलीवुड का ध्येय वाक्य है ‘शो मस्ट गो ऑन।’ और आरके स्टूडियो में शो (शूटिंग और नाटक) बंद नहीं होने चाहिए। राज्य सरकार और महानगर पालिका आगे आए और भारतीय सिनेमा के पहले गे्रट शो मैन राजकपूर की इस धरोहर को संरक्षित करने की पहल करे। ‘कल खेल में हम हों न हों, गर्दिश में तारे रहेंगे सदा, भूलेंगे हम, भूलोगे तुम पर हम तुम्हारे रहेंगे सदा, रहेंगे यहीं अपने निशां...।’