
आज जब हम महात्मा गांधी की जयंती पर चिंतन करते हैं तो हमें दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के ये शब्द याद आते हैं— ‘भारत गांधी का जन्मस्थान है, दक्षिण अफ्रीका उनकी कर्मभूमि। वे भारतीय भी थे और दक्षिण अफ्रीकी भी। मोहनदास करमचंद गांधी से महात्मा बनने की उनकी यात्रा दक्षिण अफ्रीका की मिट्टी में गहराई से जुड़ी थी। दोनों देशों ने उन्हें बौद्धिक और नैतिक प्रतिभा को गढ़ा और उन्होंने उपनिवेशवाद के दौर में दोनों मोर्चों पर स्वतंत्रता आंदोलनों को दिशा दी।’
आज की विभाजित दुनिया में यह और भी जरूरी हो जाता है कि हम उन 21 वर्षों के महत्त्व पर विचार करें, जो मोहनदास करमचंद गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में बिताए। दक्षिण अफ्रीका में उनके 21 वर्षों का संघर्ष सत्याग्रह और अहिंसा की उनकी विचारधारा और दृष्टि के विकास के लिए निर्णायक साबित हुआ। गांधी ने भारतीय मूल के गिरमिटिया मजदूरों के अधिकारों और कल्याण के लिए अहम भूमिका निभाई।
एक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में उनका जीवन निष्क्रिय प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा के मार्ग से परिपक्व हुआ और दक्षिण अफ्रीका में ही उन्होंने अपने वैश्विक दृष्टिकोण और आंतरिक शक्ति को निखारा। उनके उल्लेखनीय योगदानों में से एक 1894 में नटाल इंडियन कॉन्ग्रेस (एनआईसी) की स्थापना में उनकी सक्रिय भागीदारी थी, जो भारतीय प्रवासियों के हितों की रक्षा के लिए समर्पित संगठन था।
गांधी लाखों दक्षिण अफ्रीकियों के लिए प्रेरणा बने, जिसका प्रमाण 1952 के प्रतिरोध अभियान में जन-समूह की भागीदारी थी। दक्षिण अफ्रीका ने रंगभेद-विरोधी संघर्ष में भारत की भूमिका की मान्यता स्वरूप 2002 में महात्मा गांधी को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द कम्पैनियंस ऑफ ओ.आर. टैम्बो (स्वर्ण पदक)’ प्रदान किया। आज भी मंडेला और गांधी की दृष्टि वह सुनहरा धागा है, जो हमारे राष्ट्रों को जोड़ता है। महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला की भावना से प्रेरित होकर दोनों देश एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और सतत भविष्य बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। गरीबी उन्मूलन और अल्प विकास की चुनौती को साझा समस्या माना गया है। हाल में दक्षिण अफ्रीका के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री भारत आए और दोनों देशों ने अधिक सक्रिय आर्थिक सहयोग का संकल्प लिया।
गांधी और मंडेला की विरासत यह सिद्ध करती है कि हर व्यक्ति के भीतर यह शक्ति निहित है कि वह इस दुनिया को और अधिक मानवीय और बेहतर बना सके।
Published on:
02 Oct 2025 04:09 pm
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