
Paris Olympics 2024: हर एथलीट का सपना होता है कि वह अपने देश के लिए ओलंपिक में पदक जीते, लेकिन कभी-कभी ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं कि उसे किसी दूसरे देश में शरण लेने को मजबूर होना पड़ता है। इन एथलीटों का ओलंपिक में खेलने का सपना दम ना तोड़ दे, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी (IOC) रिफ्यूजी (शरणार्थी) स्कॉलशिप प्रोग्राम चलाती है। इसी के तहत ओलंपिक रिफ्यूजी फाउंडेशन ने हाल ही में पांच और एथलीटों को इसमें शामिल किया है।
इस तरह मिलती है एथलीटों को मान्यता
एथलीट जिस खेल में प्रतिस्पर्धा करेगा, उसमें वह शीर्ष स्तर का होना चाहिए। एथलीट जिस देश में रह रहा है, उसे वहां यूएनसीएचआर और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी द्वारा मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।
आईओसी कार्यकारी बोर्ड प्रत्येक एथलीट के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए पेरिस 2024 के लिए शरणार्थी ओलंपिक टीम की संरचना तय करेगा। इस दौरान ईबी खेल, जेंडर और क्षेत्रों के संदर्भ में संतुलित प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखता है।
1. मतिन बालसिनी
2020 टोक्यो ओलंपिक खेलों में ईरान का प्रतिनिधित्व करने वाले मतिन (23 साल) ने 2022 में निजी कारणों से देश छोडऩे का फैसला किया। उन्हें ब्रिटेन में शरण मिली। पेट पालने के लिए उन्हें सरे में लाइफगार्ड की नौकरी करनी पड़ी। यहां उनकी मुलकात तैराकी कोच ली से हुई और उन्होंने दोबारा ट्रेनिंग करनी शुरू कर दी।
2. फर्नाडो जोर्गे
2020 टोक्यो ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले स्प्रिंट नौकायन एथलीट फर्नाडो (25 साल) ने 2022 में अपना देश छोड़ दिया। हालांकि उनके लिए राह आसान नहीं रही लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने कोच एलेन के सहयोग से फ्लोरिडा स्थित अपने घर के पास ही नहर में ट्रेनिंग करना शुरू कर दिया।
3. मूसा सुलिमान
मूसा (20 साल) ने छोटी उम्र से ही युद्ध और विस्थापन की कठिनाइयों का अनुभव किया। उन्हें परिवार की सहायता के लिए नौ साल की उम्र से ही काम करना पड़ा। मूसा एक शरणार्थी के रूप में 2021 में स्विट्जरलैंड पहुंचे और एक स्थानीय एथलीट क्लब से जुड़ गए। वह 400 मीटर स्पर्धा में कई पदक जीत चुके हैं।
4. रामिरो मूरा
पिता के जल्द निधन के कारण रामिरो (28 साल) का पालन-पोषण उनकी मां ने किया। अपने एक दोस्त के कारण रामिरो भारोत्तोलन में आए। लेकिन उनकी मां का भी कुछ समय बाद निधन हो गया। 14 साल की उम्र में उन्होंने एक सहायक कोच के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया। लेकिन अच्छे हालात नहीं होने के कारण वह 2019 में ब्रिटेन आ गए।
5. आर्यन सईद पनाह
राजनीतिक कारणों से ईरान को छोडऩे के बद आर्यन ने 2022 में स्पेन में शरण ली। 11 साल की उम्र से मुक्केबाजी करने वाले आर्यन रिफ्यूजी एथलीट स्कॉलरशिप के तहत मैड्रिड में ट्रेनिंग करते हैं। उनका सपना पेरिस ओलंपिक में पदक जीतना है।
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Published on:
11 Apr 2024 08:36 am
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