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मां बनने के बाद शानदार वापसी करते हुए सनातोम्बी चानू ने 37वें राष्ट्रीय गेम्स में जीता गोल्‍ड

मणिपुर की वुशु खिलाड़ी सनातोम्बी चानू ने 37वें राष्ट्रीय गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है। चानू ने कहा कि मैंने पहले भी कई पदक जीते हैं, लेकिन राष्ट्रीय खेलों में जीता गया स्वर्ण पदक मेरे लिए काफी खास है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुझे अपनी डेढ़ साल की बेटी से अलग होकर यहां आना पड़ा। यह मेरे लिए बेहद भावनात्मक पल है।

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मां बनने के बाद शानदार वापसी करते हुए सनातोम्बी चानू ने 37वें राष्ट्रीय गेम्स में जीता गोल्‍ड।

मां बनने के बाद किसी भी महिला खिलाड़ी के लिए ट्रेनिंग और पदक जीतना बहुत मुश्किलों भरा रहता है। अनुभवी वुशु खिलाड़ी लीमापोकपम सनातोम्बी चानू के लिए भी यह आसान नहीं था। उन्होंने तमाम मुश्किलों को पीछे छोड़ा और गोवा में जारी 37वें राष्ट्रीय खेलों में ताओलू डिवीजन की ताई ची स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत लिया। खास बात यह रही कि सनातोम्बी ने मां बनने के बाद इन खेलों में वापसी की है। उन्होंने कहा कि यह पदक उनके लिए इसलिए खास है क्योंकि वह अपनी डेढ़ साल की बेटी को अपने पिता के पास मणिपुर में घर पर छोडकऱ राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने पहुंची थी।


एशियन गेम्स में नहीं जाने से थी निराश

मां बनने के बाद लीमापोकपम सनातोम्बी के लिए ट्रेनिंग शुरू करना बेहद मुश्किल भरा रहा, क्योंकि बॉडी का मूवमेंट आसान नहीं था। उन्हें धीरे-धीरे ट्रेनिंग शुरू करने से पहले हल्की जॉगिंग करनी पड़ी। वह अपने खोए हुए आत्मविश्वास को हर-हाल में पाना चाहती थी, क्योंकि तीन महीने बाद ही उन्हें सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप (नवंबर 2022) में हिस्सा लेना था। उनकी मेहनत रंग भी लगाई।

उन्होंने मां बनने के छह महीने के भीतर ही मैट पर वापसी की और पटियाला में राष्ट्रीय शिविर में पिछले साल नवंबर में सीनियर नेशनल में स्वर्ण पदक जीता। यह उपलब्धि हासिल करने के बावजूद उन्हें हांगझाऊ एशियन गेम्स 2023 में नहीं भेजा गया, क्योंकि उन्होंने 2019 के बाद से किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया था।

पुरस्कार से मिले पैसों से चुकाया कर्ज

इम्फाल में एक किसान के घर जन्मी सनातोम्बी पांच बहनों में तीसरे नंबर पर हैं। 2004 में खेल में आने के बाद से उन्होंने कई वित्तीय बाधाओं को पार किया। कई बार ऐसे मौके भी आए जब पैसों की कमी के कारण वह टूर्नामेंट में भाग नहीं ले सकी। लेकिन उन्हें हमेशा यह विश्वास रहा कि एक दिन चीजें बेहतर होंगी। उनके लिए वह पल 2007 में आया, जब उन्हें 1.70 लाख रुपए का नकद पुरस्कार मिला। इससे उन्हें कर्ज चुकाने में मदद मिली और 2011 में जीते गए स्वर्ण पदक का मतलब था कि अब वह अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकती हैं।

उम्र कोई बाधा नहीं

खास बात यह रही कि सनातोम्बी के जुनून के आगे उम्र भी बाधा नहीं बन सकी। 34 साल की उम्र होने के बावजूद सनातोम्बी ने खेलों में सफल वापसी की और स्वर्ण पदक जीता।

पति जेम्स भी हैं एथलीट

सनातोम्बी के पति जेम्स बॉय सिंह भी एथलीट हैं और अभी सर्विसेज केनोइंग और कयाकिंग टीमों को कोचिंग देते हैं। सनातोम्बी ने कहा कि उन्हें वापसी करने में अपने पति का पूरा सहयोग मिला।

मणिपुर पुलिस में कार्यरत

सनातोम्बी अभी मणिपुर पुलिस में एएसआइ के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि वे अगले कुल साल और खेलना चाहती हैं। इसके बाद उनकी नजरें कोचिंग देने पर है।