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Taipei Open: 17 साल की तन्वी शर्मा ने रचा इतिहास, सबसे कम उम्र में ताइपे ओपन जीत साइना नेहवाल के क्लब में हुई शामिल

तन्वी शर्मा ताइपेई ओपन का खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं। भारत के लिए आखिरी बार ताइपेई ओपन 2008 में साइना नेहवाल ने जीता था। 18 साल बाद तन्वी ने अब इस खिताब को वापस भारत लाया है।
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भारत

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Siddharth Rai

Aug 02, 2026

Tanvi Sharma

भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी शर्मा (Photo - IANS)

Tanvi Sharma, Taipei Open champion: भारत को बैडमिंटन में एक नया सितारा मिल गया है। होशियारपुर की 17 वर्षीय तन्वी शर्मा ने ताइपेई ओपन का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने फाइनल में वियतनाम की थुई लिन्ह न्गुयेन को 21-16, 21-16 से हराया। इसी के साथ वे इस खिताब को जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गई हैं।

18 साल के बाद भारत ने जीता ताइपेई ओपन

ताइपेई ओपन का खिताब जीतकर तन्वी दिग्गज साइना नेहवाल के एक खास क्लब में भी शामिल हो गईं। भारत के लिए आखिरी बार ताइपेई ओपन 2008 में साइना नेहवाल ने जीता था। 2009 में टूर्नामेंट के ग्रां प्री गोल्ड दौर में ज्वाला गुट्टा और वी. दिजू की मिक्स्ड डबल्स जोड़ी की जीत के बाद यह देश की कुल तीसरी जीत है।

तन्वी के युवा करियर का यह केवल दूसरा बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल मुकाबला था। इससे पहले, यूएस ओपन में बेइवेन झांग से हारकर वह उपविजेता रही थीं। 17 साल और 222 दिन की उम्र में, वह टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे कम उम्र की फाइनलिस्ट भी बनीं। उन्होंने कोरियाई डबल्स दिग्गज ली योंग डे का रिकॉर्ड तोड़ा, जो 2006 में पुरुषों के डबल्स खिताबी मुकाबले में पहुंचने के समय 17 साल और 287 दिन के थे।

जीत के बाद तन्वी का बयान

जीत के बाद खुशी से झूमते हुए तन्वी ने कहा, “बहुत-बहुत खुशी हो रही है। मुझे उम्मीद नहीं थी कि यहां खिताब जीत जाऊंगी। लेकिन सोचा कि अपना बेस्ट दूंगी। मैच दर मैच आगे बढ़ती गई। हर मैच अच्छा खेला। थोड़ी नर्वस जरूर थी, लेकिन सोचा 100 प्रतिशत खेलूंगी। जो मेरा गेम है, वही खेलूंगी और मैंने अपना गेम खेला।”

2026 का अपना पहला सुपर 300 खिताब जीतते हुए तन्वी ने शानदार प्रदर्शन किया। मैच के दौरान बढ़त गंवाने की उनकी आदत ने खेल में रोमांच पैदा किया, साथ ही उन्होंने बेहतरीन टाइमिंग वाले सीधे स्मैश समेत कई शानदार शॉट्स भी लगाए।

तन्वी ने तेजी से अपना दबदबा बनाया

शुरुआती गेम में तन्वी ने तेजी से अपना दबदबा बनाया और 10-2 की बढ़त हासिल कर ली, हालांकि गुयेन ने अंतर को कम करके 10-8 कर दिया, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने जबरदस्त खेल दिखाते हुए आसानी से पहला गेम 21-16 से जीत लिया।

दूसरे गेम की शुरुआत में तन्वी 0-3 से पीछे थीं, लेकिन उन्होंने जल्द ही वापसी करते हुए बढ़त बना ली और अपनी बढ़त को सात अंकों तक पहुंचाया। आक्रामक रणनीति अपनाते हुए उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी को कभी भी धीमा नहीं पड़ने दिया और बेहतरीन क्रॉस-कोर्ट शॉट्स और सटीक प्लेसमेंट का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपना मोमेंटम बनाए रखा और गेम 21-16 से जीत लिया। उन्होंने शानदार क्रॉस-कोर्ट ड्रॉप शॉट के साथ आखिरी प्वाइंट हासिल किया और सिर्फ 36 मिनट में फाइनल मुकाबला अपने नाम कर लिया।

इस जीत के साथ वह सुपर 300 या उससे ऊंचे स्तर का खिताब जीतने वाली चौथी भारतीय महिला सिंगल्स शटलर बन गई हैं और साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और देविका सिहाग के साथ एक खास क्लब में शामिल हो गईं। अपने शानदार प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए तन्वी ने कहा, "यह खिताब जीतकर मैं बहुत खुश हूं। मैंने हर कदम और हर मैच पर ध्यान देते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की और मुझे लगा कि पूरे टूर्नामेंट में मैंने बहुत अच्छा खेला। मैं थोड़ी घबराई हुई थी, लेकिन मैंने खुद से कहा कि अपना 100 प्रतिशत दूं और अपने खेल पर ध्यान बनाए रखूं।"