
एक ऐसा शिक्षक, जिसने गांव-गांव में खिलाडिय़ों की तलाश कर उन्हें तराशा, पहुंचाया बुलंदियों पर, पढ़ें पूरी खबर...
सोजतरोड/पाली। सोजतरोड के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय के शारीरिक शिक्षक भगवानसिंह राठौड़ को 2009 में राष्ट्रपति ने सम्मानित किया था। ये जिले के एक मात्र शारीरिक शिक्षक है, जिन्होंने ये उपलब्धि हासिल की। ये पुरस्कार इन्हें स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को खेल क्षेत्र में आगे बढ़ाने, खेल में रुचि जगाने तथा खिलाडिय़ों को राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए मिला। उनकी मानें तो हर विद्यार्थी में खेल की प्रतिभा छिपी होती है। जरूरत होती है इस प्रतिभा को निखारने की। ये ही कारण रहा कि भगवानसिंह जिस भी स्कूल में रहे, इन्होंने विद्यार्थियों को खेलों के प्रति जागरूक किया और उनके सि पर जीत का सेहरा भी बंधवाया। खास बात ये है कि 1972 से 2014 तक राठौड़ को राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय सहित 83 सम्मान मिल चुके हैं।
खुद अनुशासित रहेंगे तो खिलाड़ी लेंगे प्रेरणा
सोजतरोड के निकटवर्ती भैसाणा गांव में जन्मे भगवानसिंह ने पहली नौकरी सुमेरपुर के बांकली में भी। इसके बाद वोपारी, सिसरवादा, धुंधला, बड़ा गुड़ा सहित सोजतरोड में शारीरिक शिक्षक की भूमिका निभाई। ये जिस भी स्कूल में रहे, वहां खिलाडिय़ों की शानदार टीम तैयार की। इन टीम के खिलाडिय़ों को जिला ही नहीं, राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक खेलाने ले गए। इससे खिलाडिय़ों में भी खेल के प्रति रुचि जाग्रत हुई। इनका कहना है कि खेल में हम खुद रुचि लेंगे तो खिलाड़ी भी तैयार होंगे। खुद के खिलाड़ी होने व कोच होने का फायदा मिला, जिससे ये खिलाडिय़ों को तैयार कर पाए। इनका कहना है कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए जरूरी है कि अनुशासन की पालना करवाई जाए।
यह मिले सम्मान
- 2009 में राष्ट्रपति से सम्मान।
- 2009 में राज्य स्तर पर उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान।
- 2010 में ग्लोबल अचीवर फाउंडेशन ऑफ एजुकेशन एक्सिलेंसी बैकॉक का सम्मान।
- 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रीय विद्या रत्न पुरस्कार।
- 2006 में जिला स्तर पर खेल में उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान।
- 2011 में पुरस्कृत शिक्षक फोरम राजस्थान द्वारा प्रशस्ति पत्र।
- 2009 में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विकास संघ नई दिल्ली से सम्मान।
- 2012 में इकोनॉमी ग्रोथ सोसायटी काठमांडू नेपाल में सम्मानित।
- 2011 में राजीव गांधी समरसता अवार्ड नई दिल्ली।
- 2007 में चित्तौडगढ़़ में पद्मिनी पुरस्कार।
- 2008 में एसएसए पाली द्वारा आदर्श शिक्षक का सम्मान
- 2008 मेंं उपनिदेशक प्रा.शि. जोधपुर द्वारा सम्मानित
अन्य क्षेत्रों में भी कमाया नाम
भगवानसिंह राठौड़ ने खेल के साथ ही सांस्कृतिक क्षेत्र में भी खूब नाम कमाया। इनको 2006 में मरू महोत्सव जैसलमेर में मरूश्री सम्मान, 2009 में जोधपुर राजस्थानी वेशभूषा का प्रथम पुरस्कार, 2009 में गोडवाड़ महोत्सव में गोडवाड़ श्री पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।
Published on:
04 Sept 2019 07:30 am
