जितना सुना था, बांडी-नेहड़ा के हालात उससे भी बदतर

प्रदूषण के हालात जानने राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की चेयरमैन अर्पणा अरोड़ा पहुंची पाली, कहा-
पहली बार हालात जानने आईं पाली

By: rajendra denok

Published: 24 Jul 2018, 12:08 PM IST

ओम टेलर

पाली/रोहट/गिरादड़ा. शहर में चल रही औद्योगिक इकाइयों की ओर से अभी तक भी बांडी नदी में प्रदूषित पानी चोरी-छिपे छोड़ा जा रहा है। इसकी पोल सोमवार को अचानक राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की चेयरमैन अर्पणा अरोड़ा के पाली पहुंचने पर खुल गई। उन्होंने निरीक्षण करने के दौरान यह तक कह दिया किया जितना मैंने सुना था उससे भी अधिक बदतर हालात है। ताज्जूब है लोग कैसे रहते हैं। निरीक्षण के बाद उन्होंने किसान पर्यावरण संघर्ष समिति, अधिकारियों व सीइटीपी के पदाधिकारियों की बैठक ली। उसमें भी सीइटीपी के अधिकारियों को वादे पूरे नहीं करने का कहते हुए प्रदूषण पर नाराजगी जताई।
पानी में कोई फर्क नहीं
पाली पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले सीइटीपी के ट्रीटमेंट प्लांट ४ का जायजा लिया। यहां से वे सीधे जवडिय़ा बांडी नदी पुल पर पहुंची। वहां प्रदूषित पानी व उसमें उठते झाग देखे। बदबू आने पर उनको मुंह ढंकना पड़ा। उन्होंने कहा कि ट्रीटमेंट प्लांट संख्या चार की बदबू व रंगीन पानी जैसा ही पानी यहां है। यहां सरपंच दीपाराम के साथ किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों व ग्रामीणो ने प्रदूषण की समस्या के बारे में बताया। ग्रामीण बोले प्रदूषण के कारण आने वाली गंध से रात को सो तक नहीं पाते हैं। सांस लेना मुश्किल हो गया है। प्रदूषण के कारण कुओं का पानी तक रंगीन हो गया है। अब तो इस पानी से सिंचाई तक नहीं कर पाते हैं। इस पर चेयरमैन ने बोर्ड के अधिकारियों से कुओं से पानी के सेम्पल लेकर जांच करवाने को कहा। निरीक्षण के दौरान नदी किनारे स्लज देखकर चेयरमैन अरोड़ा ने कलक्टर से कहा कि यहां महज दो जेसीबी लगाकर स्लज हटाना ठीक नहीं था। वह भी स्लज इसी जगह डाल दी। जो वापस नदी में आ रही है।
आरोप - रात में खाली होते हैं टैंकर
ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय नदी में प्रदूषित पानी के टैंकर खाली किए जाते हैं। पिछले दिनों एक टैंकर नदी में गिर गया था। इससे पुल जवडि़या-गिरादड़ा का पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है। इस दौरान प्रधान श्रवण बंजारा, सरपंच दीपाराम मकवाना, घीसूलाल सीरवी, हरीसिंह भाटी, वार्डपंच नारायणलाल घांची, मदनदास, पारसराम माली, प्रभुसिंह भाटी, बाबूलाल भील समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
किसान बोले नदी में छोड़ा पानी
नेहड़ा बांध पर मौजूद किसानों ने कहा कि प्रदूषित पानी रोकने के लिए बांध में रोके लगाए गए थे। वह तोडक़र नदी में पानी छोड़ दिया गया। अभी भी टैंकर व पाइप लाइन के जरिए पानी छोड़ा जा रहा है। इस दौरान जिला कलक्टर सुधीर कुमार शर्मा, मेम्बर सैकेट्री अरुण प्रसाद, वरिष्ठ अभियंता राजेश ठकुरिया, आरओ राजीव पारीक, कनिष्ठ वैज्ञानिक दीपक ओझा, यशपाल सिंह, किसान पर्यावरण संघर्ष समिति अध्यक्ष पुखराज पटेल, गंगादान चारण, पंचायत समिति सदस्य मेहरदान चारण, सरपंच लक्ष्मणराम भूरिया, वागाराम विश्नोई, नाथुदान चारण, गिरधारीसिंह राजपुरोहित आदि मौजूद थे।
प्लांट तीन व छह देखकर ली बैठक
नेहड़ा से लौटते समय उन्होंने ट्रीटमेंट प्लांट संख्या तीन व छह का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारियों की बैठक में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से पूछा आपकी नदी व बांध में प्रदूषित पानी जा रहा है। इसके बावजूद आपने कार्रवाई क्यों नहीं की। इसका सिंचाई विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। सीइटीपी के अधिकारियों को बैठक में कहा कि धरातल पर प्रदूषण मिटाने का कोई कार्य नहीं हो रहा है। ट्रीटेड पानी का रियूज करने के आदेश होने के बावजूद उसे नदी में बहाया जा रहा है। उन्होंने जल्द ही स्थिति में सुधार लाने को भी कहा।

 

rajendra denok Reporting
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