
बांगड़ अस्पताल - चिकित्सकों की आपसी खींचतान बनी मरीजों के लिए आफत
पाली। बांगड़ अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञों में आपसी खींचतान से मरीजों को परेशान हो पड़ रहा है। ताजा मामला यह है कि दो शिशु रोग विशेषज्ञ
पिछले दो दिनों से निर्धारित ओपीडी कक्ष में बैठने की अपेक्षा कमरा नम्बर दस में बैठ रहे है। जिससे ओपीडी खाली मिलने से कई परिजन बच्चों का इलाज करवाए बिना ही घर लौट रहे है तो कई जने पूछताछ करने के बाद कमरा संख्या दस में चिकित्सकों से बच्चों को इलाज करवा रहे है। मामले में दोनों चिकित्सकों का कहना है कि निर्धारित ओपीडी कक्ष में गर्मी लगती है इस कारण एसी लगे कमरा संख्या दस में बैठकर मरीजों को देख रहे है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रफीक कुरेशी व डॉ. एसएन स्वर्णकार मंगलवार व गुरुवार को ओपीडी में बैठते है। जिसके लिए शिशु रोग विभाग नाम से कक्ष निर्धारित है। जहां बने चेम्बर में चिकित्सकों के बैठने की व्यवस्था तथा गैलेरी में मरीजों के खड़े होने की व्यवस्था है लेकिन पिछले दो दिनों में दोनों चिकित्सक अपने निर्धारित ओपीडी में न बैठकर कमरा संख्या दस में बैठकर मरीजों को देख रहे है। जिससे बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल लेकर आने वाले मरीजों को ओपीडी खाली नजर आता है। कई जने तो चिकित्सक को नहीं देख निजी अस्पताल चले जाते है। मामले में डॉ. आरके विश्नोई का कहना है कि उन्होंने दो चिकित्सकों अपने निर्धारित चेम्बर में बैठने के लिए कहा जिससे की मरीजों को परेशानी न हो।
चिकित्सकों में वर्चस्व की लड़ाई
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.के. विश्नोई व डॉ.एस.एन. स्वर्णकार व डॉ. रफीक कुरेशी के बीच खिंचतान का मामला पुराना है। पूर्व में भी चिकित्सकों द्वारा एक-दूसरे के मरीज का इलाज बदलने सहित निशुल्क जांच सुविधा अस्पताल में होने के बाद भी बाहर से जांच करवाने का मामला सामने आया था। इनकी आपसी अनबन को दूर करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने हस्तक्षेप भी किया था।
बिठाकर करेंगे समझाइश
शिशु रोग विशेषज्ञों को अपने निर्धारित चेम्बर में ही बैठना चाहिए। वे चेम्बर छोड़ कमरा संख्या दस में क्यों बैठे इसको लेकर उनसे बातचीत करेंगे उनकी कोई समस्या होगी तो समाधान करेंगे।
- डॉ. के.सी. अग्रवाल, प्रिसपल बांगड़ मेडिकल कॉलेज पाली
गर्मी लगती है इसलिए कमरा संख्या दस में बैठे
ओपीडी में बने चेम्बर में गर्मी लग रही थी। इसलिए एसी लगे कमरा संख्या दस में बैठकर मरीजों को देखा। मरीजों को परेशानी न हो इसलिए गार्ड को बोल दिया था कि वह मरीजों को कमरा संख्या दस में भेजे।
- डॉ. रफीक कुरेशी, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ, बांगड़ अस्पताल, पाली
Published on:
26 Jul 2019 07:00 am
