4 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

धर्मों-संस्कृति दर्शन : मंदिरों का शहर है कंबोडिया का अंगकोरवाट

Patrika Guest Writer: दीप्ति कटारिया, अध्यक्ष, भारतीय समुदाय मिस्र  

2 min read
Google source verification

पाली

image

Suresh Hemnani

Dec 14, 2023

धर्मों-संस्कृति दर्शन : मंदिरों का शहर है कंबोडिया का अंगकोरवाट

धर्मों-संस्कृति दर्शन : मंदिरों का शहर है कंबोडिया का अंगकोरवाट

Patrika Guest Writer: कंबोडिया में जब भी आप कंबोडियाई ध्वज देखेंगे, राष्ट्रगान सुनेंगे या दुकानों का नाम देखेंगे तो आपको अंगकोरवाट की झलक दिखाई देगी।

अंगकोरवाट एक अद्भुत पर्यटन स्थल है जहां प्रति वर्ष दस लाख से अधिक विदेशी पर्यटक आते हैं। यह कला और वास्तुकला, शहर नियोजन, सड़क निर्माण और हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग जैसे कुछ क्षेत्रों में खमेर (कम्बोडियन) पूर्वजों की असाधारण उपलब्धियों की याद दिलाता है।

अंगकोरवाट मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में राजा सूर्यवर्मन द्वितीय (शासनकाल 1113-सी. 1150) द्वारा किया गया था। अंगकोरवाट लगभग 400 एकड़ को कवर करते हुए दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक संरचना है।

खमेर( कम्बोडियन) भाषा में अंगकोर का अर्थ है ‘शहर’ और वाट का अर्थ है ‘मंदिर’। अत: अंगकोरवाट का अर्थ है ‘मंदिरों का शहर’। अंगकोरवाट का मूल नाम ‘वराह विष्णुलोक’ या ‘परम विष्णुलोक’ था। जिसका संस्कृत अर्थ है ‘भगवान विष्णु का पवित्र निवास’। अंगकोरवाट एक केंद्रीय अभयारण्य के साथ तीन दीर्घाओं से युक्त है, जो पांच पत्थर के टावरों से घिरा हुआ है। पांच पत्थर के टावरों का उद्देश्य माउंट मेरु की पांच पर्वत श्रृंखलाओं का प्रतिनिधित्व करना है , जो हिंदुओं और बौद्धों दोनों के लिए देवताओं का पौराणिक घर है।

भगवान विष्णु की स्थापित है प्रतिमा
पांचों शिखर एक खाई से घिरे हुए हैं, जो महासागरों से घिरे मेरु पर्वत की छवि देता है। अंगकोरवाट के पश्चिमी प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु की 5 मीटर ऊंची प्रतिमा है, जिसे स्थानीय लोग 'तारीच' के नाम से जानते हैं। इसे बलुआ पत्थर के एक टुकड़े से तराशा गया है, जो रंग-बिरंगे कपड़ों और साइट पर आने वाले तीर्थयात्रियों के प्रसाद से ढका हुआ है। अंगकोरवाट की दीवारों पर रामायण और महाभारत दोनों महाकाव्य कथाओं का पूरा चित्रण है। समुद्रमंथन का भी चित्रण मंदिर की दीवारों पर विष्णु के नरसिम्हा अवतार की कहानी भी प्रतिबिंबित है।

भारत तक सीमित नहीं है हमारी धरोहर
यह हमारी वैदिक परंपरा की जड़ों पर गर्व की अनुभूति है, जो भारत तक ही सीमित नहीं है। अंगकोर का जादू इसकी गहन आध्यात्मिकता में निहित है जो सदियों से कायम है। दक्षिण भारतीय शैली के साथ मिश्रित अद्वितीय खेमर वास्तुकला इस स्थल को रत्नों में हीरा बनाती है।