6 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मुख्यमंत्री ने दिखाई सख्ती, फिर उड़ी विभाग की नींद

- आबकारी विभाग की कार्रवाई में पांच शराब ठेकों पर ओवररेट का मामला आया सामने
2 min read
Google source verification

पाली

image

Suresh Hemnani

Jan 21, 2019

Chief Minister appeared strictly, then the sleeping department's sleep

मुख्यमंत्री ने दिखाई सख्ती, फिर उड़ी विभाग की नींद

पाली। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से पुलिस व आबकारी अधिकारियों की बैठक में रात आठ बजे बाद शराब ठेके खुलने, अवैध शराब बिक्री व अंकित मूल्य से अधिक रेट पर शराब बेचने पर कार्रवाई करने के निर्देश के बाद आबकारी विभाग की नींद उड़ी हुई है। अधिकारियों ने आनन-फानन में जिले में कार्रवाई करना शुरू कर दिया है। शहर सहित जिले के पांच ठेकों पर ओवररेट के पांच मामले सामने आए है। इन शराब ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री गहलोत ने एक दिन पूर्व बैठक कर शराब बिक्री पर सख्त निर्देश दिए। इस पर आबकारी विभाग हरकत में आया। जिला आबकारी अधिकारी गेमराराम सुथार ने बताया कि सोजत में दो, पाली में एक, सुमेरपुर में दो मामले ओवररेट के मामले सामने आए है। अधिकारियों को रात आठ बजे बाद शराब ठेकों की जांच करने को कहा गया है। रात आठ बजे बाद किसी भी ठेके पर शराब बिक्री होना सामने आया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी प्रकार अवैध शराब की बिक्री पर होटलों, ढाबों व शराब ठेकों पर नजर रखी जा रही है।

इतने दिन नींद में, अब जागे
जानकारों की माने तो अब तक जिले में ओवररेट व अवैध शराब बिक्री की आमजन ने कई शिकायतें की थी, लेकिन आबकारी विभाग गंमीर कार्रवाई नहीं करता था। फौरी तौर पर मुकदमे बनाकर इतिश्री कर ली जाती थी। अब आबकारी विभाग की नींद उड़ी हुई है। आबकारी विभाग की इस सख्ती से शराब ठेकेदारों में हडक़ंप मचा हुआ है।

बीच राह में हांफी रोडवेज बस
रायपुर मारवाड़। जोधपुर से रवाना होकर भीलवाड़ा जा रही ब्यावर डिपो की रोडवेज बस रास्ते में हांफ गई। बस खराब होने के कारण यात्रियों को दूसरी बस में बैठकर ब्यावर जाना पड़ा। यह बस बर के बस स्टैण्ड पहुंची और बंद हो गई। जो वापस चालू नहीं हो सकी। इस पर चालक ने ब्यावर डिपो में सूचना दी। इसके एक घण्टे बाद भी दूसरी बस नहीं भेजी गई। एेसे में यात्रियों को अन्य डिपो की बस में बैठ ब्यावर जाना पड़ा। वहां से उन्हें भीलवाड़ा के लिए दूसरी बस पकडऩी पड़ी।