
बच्चों को बहरेपन की बीमारी से बचाने के लिए चिकित्सकों ने बताए ये उपचार, जानिए पूरी खबर
पाली। राजकीय मेडिकल कॉलेज में क्लीनिकल सेमिनार हुई। इसमें कान, नाक व गला विभाग के प्रभारी डॉ. गौरव कटारिया ने व्याख्यान दिया। इसमें बच्चों के जन्मजात बहरेपन और गूंगेपन के निदान एवं उपचार के बारे में बताया।
डॉ. कटारिया ने बताया कि बच्चे के बहरेपन के बारे में 1 से 2 साल की उम्र में ही पता चल जाए तो संबंधित विषय के चिकित्सक से परामर्श ले लेना चाहिए, ताकि इस व्याधि का निदान एवं उपचार हो सके। गूंगेपन और बहरेपन का उपचार 5 वर्ष की उम्र तक ही संभव है। अज्ञानता और अंधविश्वास की वजह से माता पिता बच्चों की उम्र 5 वर्ष से ज्यादा होने तक इधर-उधर भटकते रहते हैं। इसके बाद उपचार संभव नहीं होता है।
इस मौके पर प्रधानाचार्य और नियंत्रक डॉ. केसी अग्रवाल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में प्रत्येक माह इस तरह की क्लीनिकल सेमिनार होती है। इस मौके पर डॉ. हरीश कुमार, डॉ. एमएल लोहिया, डॉ. तोसनीवाल, डॉ. निखा भारद्वाज, डॉ. अरुणा सोलंकी, डॉ. संजय चौधरी, डॉ. लतिका, डॉ. रितू, डॉ. वीरेंद्र चौधरी, डॉ. नरपत सिंह सहित कई चिकित्सक मौजूद थे।
Updated on:
24 May 2019 02:28 pm
Published on:
24 May 2019 02:28 pm
