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प्रदेश के इस इलाके में करोड़ों का भुगतान अटका, अब आत्महत्या करने की आई नौबत, देखें पूरी खबर…

- चार साल बीते, जलग्रहण का भुगतान अटका - सरकार व प्रशासन के बीच फुटबाल बना भुगतान  
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पाली

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Rajkamal Vyas

Jun 09, 2019

Crores of rupees are stuck, see the whole news...

प्रदेश के इस इलाके में करोड़ों का भुगतान अटका, अब आत्महत्या करने की आई नौबत, देखें पूरी खबर...

पाली। मारवाड़-गोडवाड़ में जलग्रहण योजना (आइडब्ल्यूएमपी) के तहत चार साल पूर्व काम पूरा करने वाली एजेंसियों का करोड़ों रुपए का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। हर साल बारिश का मौसम निकल जाता है, लेकिन काम करने वाली एजेंसियों की भुगतान की आस पूरी नहीं हो पा रही है। अब उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है और वे अब आत्महत्या करने को मजबूर है। मामला सरकार व प्रशासन के बीच फुटबाल बना हुआ है। अब एजेंसी संचालक उप मुख्यमंत्री से आस लगाए बैठे हैं। वर्ष 2014-15 में जलग्रहण योजना के तहत पाली जिले के रोहट, देसूरी, मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र के गांवों में करोड़ों के काम हुए। जिन एजेंसियों ने काम पूरा कर लिया, उनका भुगतान अभी तक नहीं किया गया। कुछेक जगहों पर एनजीओ के मार्फत काम हुए, वहां एनजीओ ने भुगतान ले लिया और एजेंसियों को नहीं दिया। ऐसे में अब इन एजेंसियों के संचालकों की हालत खस्ता हो गई है। पहले पूर्व राज्य सरकार के इर्द-गिर्द मामला घूमता रहा, अब एजेंसी संचालक नई सरकार के चक्कर लगा रहे हैं। प्रशासन व स्थानीय ग्राम पंचायतों ने भी इनको अनसुना कर दिया।

करोड़ों रुपए बकाया, यहां हुआ काम

काम करने वाली एक एजेंसी के संचालक बिंदूसिंह ने बताया कि उसकी फर्म के मार्फत देसूरी में 18 लाख रुपए, सुमेर में 10.51 लाख रुपए, मारवाड़ जंक्शन के मांडा पंचायत में 38.89 लाख रुपए, सारण में 13.28 लाख रुपए, दुदौड़ में 63 लाख रुपए, रोहट के खारडा में 30 लाख रुपए, कुलथाना में 40 लाख रुपए, पाली पंचायत में 30 लाख रुपए के काम किए। देसूरी में हुए काम का भुगतान एनजीओ ने अटका दिया। चार साल बाद भी 1.50 करोड़ रुपए से अधिक की राशि बकाया है। इसी प्रकार रोशन खान ने बताया कि बाली क्षेत्र में उसने काम किया, लेकिन भुगतान नहीं मिला। एजेंसी संचालकों का कहना है कि भुगतान नहीं होने से उनकी कमर टूट चुकी है। आर्थिक हालत खराब हो चुकी है। समय रहते भुगतान नहीं हुआ तो उनके सामने आत्महत्या ही रास्ता है।

उप मुख्यमंत्री के सामने उठाएंगे मुद्दा

काम करने वाले संचालकों का कहना है कि करोड़ों की राशि बकाया चलने के कारण एजेंसियों के बुरे हाल है। अब एजेंसियों के संचालकों ने बताया कि पाली दौरे पर आ रहे उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के सामने ये मामला उठाएंगे।

इस मामले को दिखाएंगे

जलग्रहण योजना का काफी भुगतान हो चुका हैं, एनजीओ को भुगतान किया है। फर्मों का बकाया एनजीओ के मार्फत रुका हुआ हो सकता है। इसके बावजूद भुगतान को लेकर कुछ समस्या या मामला है तो वे लोग जिला कलक्टर कार्यालय सम्पर्क कर सकते हैं।

- दिनेशचंद जैन, जिला कलक्टर, पाली।