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पचायंत नहीं कर रही खर्च, बांध हो रहे क्षतिग्रस्त

- बजट के अभाव में जर्जर हो रहे बांध
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Do not waste pond, dam damaged

पचायंत नहीं कर रही खर्च, बांध हो रहे क्षतिग्रस्त

घाणेराव। राज्य सरकार की ओर से जल संसाधन विभाग के कुछ बांधों को ग्राम पंचायतों को सौंप दिय गया था, लेकिन इनकेरखरखाव को लेकर सरकार की ओर से बजट नहीं दिया गया। यहीं कारण है कि क्षेत्र के कई बांध क्षतिग्रस्त हो गए है। स्थिति यह है कि आठ बांधों का पिछले 15 वर्ष से जीर्णोद्धार तक नहीं होने से वे अब ग्राम पंचायतों के लिए परेशानी का सबब बन गए है।


वर्ष 2001 में राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग के छोटे बांधों को ग्राम पंचायतों को सौंप दिया था। इस पर देसूरी पंचायत समिति क्षेत्र में आठ बांध ग्राम पंचायतों के पास आ गए। इसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों की आय में बढ़ोतरी करना था, लेकिन सरकार ने बांधों के रख-रखाव को लेकर कोई बजट नहीं दिया। ऐसे में अब इन बांधों को संभालना ग्राम पंचायतों के लिए मुश्किल हो गया है। आज हालत यह है कि बांधों की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई है। बांधों के जलभराव क्षेत्र में बबूल की झाडिय़ां उग गई है। कई बांधों से पानी का रिसाव हो रहा है।


नहरे हो गई क्षतिग्रस्त
कई बांधों की नहरें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। इस कारण बांध में पानी आने पर भी किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंचता है। ऐसे में किसानों को अपने स्तर पर ही पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है।


ये बांध है पंचायतों के अधीन
देसूरी पंचायत समिति के अधीन छोड़ा बांध, मांडीगढ बांध, डेडवान बांध, कोलर बांध, बागोल बांध, गुड़ा गोपीनाथ बांध, जयपालिया बांध, बाजरा बांध है। इन बांधों में मछली पालन का ठेका करने पर आया हो सकती है, लेकिन ग्राम पंचायतों के पास इसके अधिकार नहीं है।


बोझ बन गए बांध
ग्राम पंचायतों को राज्य सरकार ने बांध सौंप दिए, लेकिन बजट नहीं दिया। इस कारण पंचायतों के लिए बांधों का जीर्णोद्धार संभव नहीं है। ये बांध बोझ बन गए है। -सम्प्तदाय वैष्णव, सरपंच, ग्राम पंचायत दुदापुरा