
प्रत्येक पशु की नस्लबार मिलेगी जानकारी जानिए कैसे
पाली। जिले में पहली बार पशुओं की गणना ऑनलाइन होगी। जीपीएस इनबिल्ट टेबलेट के चलते कर्मचारियों को सटीक गणना करनी होगी। पशुपालन विभाग ने गणना का शेड्यूल तैयार कर लिया है। लक्ष्य के अनुसार आगामी तीन महीने में गणना पूरी करनी है। विभाग ने टीम भी गठित कर ली है, जो शहर सहित गांवों में जाकर पशु गणना कर टेबलेट से ऑनलाइन रिपोर्ट अपटेड करेगी।
इस बार पशु चिकित्सा के कर्मचारी करेंगे गणना
इस बार पशुगणना पशुचिकित्सा कर्मचारी ही करेंगे। नस्ल वार पशु गणना होने से सभी पशुओं में नस्लवार जिले में कितने पशु है। इसकी जानकारी सहज ही उपलब्ध हो जाएगी। योजना के तहत तीन महीने में 82 टेबलेट से 118 कर्मचारी पशु गणना करेंगे। एक अधिकारी के अधीन तीन तीन कर्मचारी काम करेंगे। पशु गणना के दौरान जिस क्षेत्र में इंटरनेट नहीं होगा, वहां डाटा फीडिंग की जाएगी। जो कि साफ्वेयर के प्रोसेस में चला जाएगा। इंटरनेंट क्षेत्र में आएंगे तो तुरंत डाटा अपडेट हो जाएगा।
पिछली बार गणना में 23 लाख थे पशु
खास बात ये है कि इसमें बेसहारा मवेशियों की भी गणना होगी। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 60 प्रतिशत पशु दुधारु होते है। बाकी पशु दूसरी किस्म के होते है। गत पशु गणना में पशुओं की संख्या करीब 23 लाख थी। ये संख्या बढऩे के आसार जताए जा रहे हैं।
सटीक हो सकेगी गणना
इस बार ऑन लाइन पशु गणना होगी, जिसमें नस्लवार पशु गणना होगी। इससे सभी पशुओं की नस्ल के बारे में सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे। नस्लवार आंकड़े होने से सरकारी योजना का काफी फायदा मिलेगा।
डॉ. चक्रधारी गौतम, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग पाली
मादा हरिण को श्वानों के चंगुल से छुड़ाया
रोहट। उपखंड क्षेत्र के जैतपुर बंींजा की सरहद में रविवार को एक मादा हरिण को श्वानों ने नोंचकर गंभीर घायल कर दिया। इसे देख ग्रामीण भीम भारती, मंडल अध्यक्ष गौतम त्रिवेदी, जयकरण जांगू, नागराज विश्नोई व लक्ष्मण दर्जी ने मादा हरिण को श्वानों के चंगुल से छुड़वाया। बाद में वनपाल श्रवण विश्नोई को सूचना देकर मौके पर बुलाया और उपचार करवाने के बाद वनपाल को सुपुर्द किया।
Published on:
01 Oct 2018 11:06 am
