
रसायन छोड़ ‘देशी’ को अपनाकर किसान होंगे मालामाल
पाली. जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। जो अब रंग लाने लगे हैं। इस बार जिले के तीन हजार किसान 3 हजार हैक्टेयर में जैविक खेती करेंगे। जबकि गत साल एक हजार किसानों ने 400 हैक्टयर में जैविक खेती की थी। जैविक खेती करने के लिए कृषि विभाग की ओर से किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रति हैक्टेयर एक किसान को 12 हजार रुपए खाद, बीज व वर्मी कम्पोस्ट बनाने के देगी।
कृषि में रासायनिक उर्वरकों, खरपतवार नाशकों तथा कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग के कारण भूमि व वातावरण में हानिकारक तत्वों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इससे पर्यावरण, मृदा उर्वरता तथा मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इससे निजात पाने के लिए सरकार परम्परागत कृषि विभाग योजना के तहत जिले में जैविक तरीके से खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहन दे रही है। इसमें उत्पादन बेहतर होने के कारण ही गत साल के मुकाबले में इस साल दो हजार किसान ज्यादा जैविक खेती करेंगे।
किसानों को मिलेगा लोगो
कृषि विभाग के सहायक निदेशक डॉ. मनोज कुमार अग्रवाल के मुताबिक किसान तीन साल तक एक ही जमीन में जैविक खेती करता है। उस जमीन में बिना रसायनों के उपयोग से जैविक खेती करने पर गाजियाबाद की राष्ट्रीय जैविक प्रमाणीकरण संस्था की ओर से किसानों को लोगो किया जाता है। यह लोगो लगा होने पर बाजार में किसानों की उपज दुगुने दामों में बिकती है।
जमीन उपजाऊ होगी
योजना का मुख्य मकसद खेती में परम्परागत ज्ञान तथा आधुनिक विज्ञान के समन्वयक से जैविक खेती संबंधित टिकाऊ मॉडल विकसित करना है। जिससे भूमि की उर्वरता में वृद्धि व संसाधनों का संरक्षण कर जलवायु पर पडऩे वाले बुरे प्रभाव को कम किया जा सके। जैविक खेती के लिए किसानों के कलस्टर का चयन कर आदान, उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, मूल्य संवद्र्धन तथा अन्य आदानों की गुणवत्ता नियंत्रण आदि का काम किया जाएगा।
150 कलस्टर बनाए जाएंगे
इस योजना का क्रियान्वयन कलस्टर के माध्यम से किया जा रहा है। वर्ष 2018-19 में 150 कलस्टर बनाए जाएंगे। इससे करीब 3 हजार किसानों को फायदा मिलेगा। एक समूह 20 हैक्टेयर का होगा। एक किसान 0.4 से 2 हैक्टेयर में जैविक खेती कर सकता है। इसके लिए प्रशिक्षण देने के बाद किसानों का पंजीयन होगा। इससे फसलों के अच्छे दाम मिल सकेंगे। रबी व खरीफ के लिए किसानों को अलग-अलग प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।
किसानों को यह होगा फायदा
-पर्यावरण संरक्षित होगा
-किसानों की महंगे आदानों पर निर्भरता कम होगी
-खेती की लागत को कम होगी
-रसायन मुक्त तथा पौष्टिक भोजन का उत्पादन करना
-विपणन के लिए स्थानीय व राष्ट्रीय बाजार से सीधे जोडक़र किसानों को उद्यमी बनाना।
तीन कलस्टर भ्रमण करवाएंगे
योजना के तहत किसानों को तीन कलस्टर भ्रमण करवाए जाएंगे। जबकि तीन प्रशिक्षण दिए जाएंगे। प्रथम प्रशिक्षण में नर्सरी में पौध तैयारी व जैविक बीज उत्पादन, जैविक खेती की आधारभूत जानकारी व दस्तावेज संधारण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। द्वितीय प्रशिक्षण में कम्पोस्टिंग, हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक आदानों के उत्पादन की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा। तृतीय प्रशिक्षण में पंचगव्य, बीजामृत, जैव उर्वरक, जैव कीटनाशकों का निर्माण व उपयोग सिखाया जाएगा।
अहमदाबाद उपज बेचता हूं
पिछले तीन साल से जैविक खेती कर रहा हूं। खरीफ की सीजन में मूंग की बुवाई करता हूं। मंूग को अहमदाबाद में बेचता हूं। वहां पर मुझे मंूग के दाम दुगुने मिलते हैं। जैविक खेती से जमीन उपजाऊ होती है। जैविक खेती से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा हैं।
गोविन्द पटेल किसान , सारा की ढाणी रोहट
किसानों का रुझान बढ़ा
जैविक खेती के प्रति किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। इस बार 3 हजार हैक्टेयर में करीब 3 हजार किसान जैविक खेती करेंगे। इसके लिए चलाई जा रही योजना के तहत प्रति किसान खादी बीज व वर्मी कंपोस्ट के लिए 12 हजार रुपए का अनुदान दिया जाएगा।
प्रदीप छाजेड़, अनुसंधान अधिकारी कृषि विभाग विस्तार पाली
Published on:
05 Mar 2019 06:00 am
