
छह में से चार जीएलआर सूखे
जैतारण. ग्राम पंचायत बिरोल में जलस्रोत गहरा जाने के कारण पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। बिरोल सहित आस-पास के क्षेत्र मे करीब ६ जीएलआर बने हुए हैं। जिनमें से चार जीएलआर सूखे पड़़े हैं। लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। केवल दो जीएलआर में पानी आ रहा है। क्षेत्र के लोगों को महंगे दाम चुकाकर निजी टयूबवेल से पानी मंगवाना पड़ रहा है। इस गांव मे पानी की अत्यधिक किल्लत होने के बावजूद भी इसे जवाई परियोजना से नहीं जोड़ा गया है। ग्राम बिरोल में जनता जल योजना के तहत स्थानीय स्तर पर पेयजल का संधारण ग्राम पंचायत द्वारा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में स्थित ***** बेरा चौकीदारो की ढाणी में ७ वर्ष पूर्ण जीएलआर बनाया गया। जिनमें पानी बंद हुए करीब ६ माह बीत चुके हैं। ग्राम पंचायत व उच्च अधिकारियों को भी पेयजल की मांग को लेकर आग्रह किया, उन्होंने आश्वासन भी दिए, लेकिन अभी तक पेयजल समस्या से राहत नहीं मिली है। बेरा बंदीया के निवासियों ने बताया कि इसी तरह राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय खारचिया बेरा के सामने बने जीएलआर एवं पशु खेली में केवल महिने में दो बार ही पानी आता है। जिससे पशुधन के लिए महंगे दाम से आपूर्ति करनी पड़ती है। बेसहारा पशुधन की हालात बिगड़ी हुई है। हालांकि ग्राम पंचायत के माध्यम से नियमित सात टैंकर शुरू किए हैं, जिससे कु छ राहत मिली है।
निजी ट्यूबवेल से जलापूर्ति
बिरोल क्षेत्र के बेरा बागरवाली पर जीएलआर बना हुआ है। वहां पर पानी पहुंचाने में जलदाय विभाग एवं ग्राम पंचायत विफल हो जाने पर वहां के निवासी हरिराम कुमावत ने अपनी निजी ट्यूबवेल से पानी का कनेक्शन कर जीएलआर में जलापूर्ति की जा रही है।
जवाई परियोजना में शामिल नहीं
ग्राम पंचायत बिरोल में पेयजल स्रोत गहरा जाने पर उपजे पेयजल संकट के बावजूद भी जलदाय विभाग ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इस गांव को जवाई परियोजना में शामिल नहीं किया है। इधर, ग्राम पंचायत क्षेत्र में कोई जलस्रोत नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने जवाई परियोजना में शामिल करने की मांग की है।
मिल सकती है राहत
ग्राम पंचायत बिरोल में से होते हुए जवाई परियोजना की लाइन मालपुरिया जा रही है। बिरोल को भी जवाई परियोजना से जोड़ा जाता है तो स्थायी समाधान हो सकता है। फिलहाल जलदाय विभाग ने ग्राम पंचायत के माध्यम से ७ टैंकर नियमित शुरू किए हैं। गर्मी में पानी की कुछ राहत मिल रही है।
जगदीश कंवर, सरपंच, ग्राम पंचायत बिरोल
Published on:
12 Jun 2019 07:05 am
