
म्हारे अठे सूं सुहागणियां और बाया भरती ही लोटियां, आज वे आवणनै तैयार कौनी
-सिरे घाट पर नगर परिषद ने लोटियां भरने के लिए रखवाए ड्रम
-अधिकांश व्रती महिलाएं हैण्डपम्प से ले गई पानी
-परिषद की ओर से लगाए शामियाने तक तो गई ही नहीं
पाली। मैं लाखोटिया तालाब हूं। यूं तो आप मेरे से कई बार मिले है। मेरे घाटों पर आए हैं, लेकिन सोमवार को गणगौर तीज पर एक बार फिर मुझे अपनी उपेक्षा ने रुला दिया। आंसू आए भी क्यों नहीं। मेरे जिस पानी दरवाजा स्थित सिरे घाट पर आने को चंद साल पहले तक हर कोई आतुर रहता था। यहां सुबह-शाम श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन करने के बाद घाट पर बैठकर मेरी लहरों को निहारते थे। वे तो आना बंद हो ही गए। आज गणगौर पर जब सुहागिनें और युवतियां लोटियां भरने आई तो मेरे बजाय हैण्डपम्प से लोटियां भरकर ले गई। उन्होंने मेरे घाट पर उतरने के लिए कदम तक नहीं बढ़ाए। जहां गणगौर को पैर रखने की जगह नहीं रहती थी। वहां पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। इससे बड़ी दुर्गति मेरी क्या होगी। जिसने सालों शहरवासियों की प्यास बुझाई और तीज-त्योहार का साक्षी रहा।
पूजन योग्य नहीं पानी
जिस सिरे घाट का पानी लोग पीने में और पूजन के लिए ले जाते थे। उपेक्षा के कारण वहां आज महिलाएं जाना तक पसंद नहीं करती है। लोटियां भरने आई महिलाओं का कहना था पहले सीढिय़ों तक पानी भरा रहता था। आज पानी में गंदगी पसरी है। पानी भी बदबू मार रहा है। इस हिस्से में अब पानी आता ही नहीं है।
यूं बिगड़े हालात
सिरे घाट को लाखोटिया से भैरूघाट के बीच रास्ता बनाने के नाम पर लाखोटिया का दूसरा हिस्सा बनाया गया था। उस समय सिरे घाट वाले हिस्से में सिटी टैंक से पानी लिया जाता था। जो हाउसिंग बोर्ड तक भरता था और जलदाय विभाग तक इससे जलापूर्ति करता था, लेकिन नगर परिषद से यह देखा नहीं गया और उसने पहले सिरे घाट के सामने एक पाळ बनाई। इसके बाद तालाब के तीन हिस्से हो गए। महज पांच-छह साल पहले परिषद ने एक बार फिर रामनगर स्थित किन्नर घाट को पाट कर कच्ची अवैध पाळ बनाकर तालाब का रहा-सहा रूप भी बिगाड़ दिया। इस कारण आज सिरे घाट का महत्व भी कम हो गया है।
पहले उमड़ती थी भीड़
सिरे घाट के तालाब से लोटियां भरने के लिए पहले भीड़ उमड़ती थी। यहां बड़ा मेला भरता था। अब तालाब में पानी गंदा होने के कारण यहां आने का मन कम करता है। मजबूरी में लोटियां भी हैण्डपम्प और ड्रम से भरनी पड़ती है। -चन्द्रकांता गोयल, शहरवासी
हरिद्वार जैसा था तालाब
हमारा तालाब हरिद्वार जैसा था। यहां से हम करीब तीस साल पहले तो पीने का पानी भी भरकर ले जाते थे। अब तो इसमें पानी है, लेकिन वह गंदा है। तालाब को वापस पूरा एक कर देना चाहिए। -चन्द्रकांता तोषनीवाल, शहरवासी
रास्ता बनाना गलत
तालाब में अब कई रास्ते बना दिए है। जो गलत है। तालाब को पूरा एक ही रखना चाहिए। यह हमारी धरोहर है। रामनगर में बनाई पाळ भी नहीं होनी चाहिए। ये हमारी प्राचीन धरोहर है। इसे पहले जैसा ही रखना चाहिए। -बसंती गुप्ता, शहरवासी
Updated on:
09 Apr 2019 01:39 pm
Published on:
09 Apr 2019 11:31 am
