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अब ऊंट व बैलगाडिय़ों से हो रहा ये कारोबार, माफिया वसूल रहे मनमाने दाम

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पाली

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Suresh Hemnani

Feb 11, 2019

Gravel transport on camels and bullocks in pali

अब ऊंट व बैलगाडिय़ों से हो रहा ये कारोबार, माफिया वसूल रहे मनमाने दाम

पाली/सुमेरपुर। प्रदेश भर में बजरी खनन पर रोक के बावजूद पहले जहा चोरी-छूपे अवैध बजरी खनन हो रहा है। अब तो क्षेत्र में दिन के उजाले में भी गली-मोहल्लों में बजरी के ढेर देखे जा सकते हैं। निजी व सरकारी निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। निगरानी के अभाव में खनन माफिया के हौंसले बूलंद है।

प्रदेश में नदियों से बजरी खनन पर रोक है। इसके बावजूद पहले रात मं बजरी से भरे ट्रैक्टर नजर आ जाते थे, अब दिन के समय को भी धड़ल्ले से सडक पर ट्रैक्टर दौड़ते हैं। बैलगाडियों व ऊंटगाडिय़ों पर जुर्माना राशि नहीं होने के कारण अब दिनभर जवाई नदी से बैलगाडिय़ों व ऊंटगाडिय़ों के माध्यम से अवैध खनन किया जा रहा है। शहर में जगह-जगह बजरी के ढेर लगे हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इतना जरूर है कि औपचारिकता निभाने के लिए पुलिस भी कभी कभार एक-दो ट्रैक्टर व डंपर जब्त कर लेती है। खनन विभाग की तरफ से तो कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इधर, सुमेरपुर-शिवगंज के बीच बहने वाली जवाई नदी में पहले के मुकाबले अधिक बजरी खनन किया जा रहा है। इसे नदी में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इसके अलावा पोमावा, पुराड़ा, नोवी समेत जवाई नदी के किनारे स्थित गांवों
की नदियों में भी खनन किया जा रहा है।

रात के अंधेरे में होता है बजरी का अवैध खनन
बजरी माफिया दिन को बजरी की खपत में लगे रहते हैं। ये लोग रात को दस बजे से अलसुबह 4 बजे तक अवैध खनन करते हैं। खनन के बाद परिवहन में अधिकांश बिना नंबरी ट्रैक्टर काम में लेते हैं।

तीन गुना अधिक दामों में बिकती है बजरी
बजरी पर रोक से पहले एक ट्रैक्टर ट्रॉली की कीमत आठ सौ रुपए थी। जो अब दो से तीन हजार में खाली की जाती है। बजरी खनन पाए जाने पर खनन विभाग संबंधित के ट्रैक्टर के 26 हजार 750 रुपए और डंपर के 16.200 टन तक होने पर 1 लाख और इससे कम होने पर 52 हजार रुपए जुर्माने के रुप में वसूल सकता है।