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अनदेखी : जिले में साक्षरता की ‘लौ’ हुई मंद, बंद पड़े हैं साक्षरता केन्द्र

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जिले में साक्षरता की ‘लौ’ हुई मंद, बंद पड़े हैं साक्षरता केन्द्र

जिले में साक्षरता की ‘लौ’ हुई मंद, बंद पड़े हैं साक्षरता केन्द्र

पाली. देश को सम्पूर्ण साक्षर बनाने के लिए वर्ष 2011 में जिला साक्षरता व सतत शिक्षा के नाम से एक दीपक जलाया गया। उसकी रोशनी से हजारों लोगों को कम से कम नाम लिखना तो सिखा ही दिया गया, लेकिन सभी निरक्षरों को साक्षर 8 वर्ष गुजरने के बाद भी नहीं किया जा सका है। साक्षरता कार्यक्रम को बंद किए भी एक वर्ष गुजरने को है और महज पाली जिले में ही 1 लाख 61हजार 622 लोग आज भी निरक्षर है। यह आंकड़े वे हैं जो वर्ष 2011 में साक्षरता कार्यक्रम शुरू करने से पहले सर्वे करने के आधार पर मिले निरक्षरों में शेष रहे है। नए सर्वे में कितने लोग निरक्षर होंगे इसकी अभी तक किसी के पास जानकारी नहीं है।


ब्लॉकवार जिले में इतने है निरक्षर
बाली 20544
देसूरी 9052
जैतारण 20835
मारवाड़ जंक्शन 21165
पाली 11632
रोहट 11636
रानी 11482
रायपुर 19715
सोजत 20858
सुमेरपुर 14703

अधिकारी नहीं मानते प्रभावी क्रियान्विति
पीइइओ को कार्य सौंपने के बाद से साक्षरता केन्द्रों का संचालन व गतिविधियों का क्रियान्वयन प्रभावी रूप से नहीं हो रहा है। यह बात स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मानते है। इसी कारण विभाग के वरिष्ठ शासन सचिव ने ३१ दिसम्बर २०१८ को माध्यमिक शिक्षा के निदेशक को पत्र लिखकर साक्षरता सम्बन्धी गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित मॉनिटरिंग व समीक्षा के साथ रिकॉर्ड संधारण करने के वापस निर्देश जारी किए थे। उस पत्र में भी प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होने की बात कही थी।

प्रेरक हटाकर कार्य सौंपा पीइइओ को
साक्षरता कार्यक्रम बंद होने पर इसमें लगाए गए प्रेरकों को हटा दिया गया। उनके स्थान पर कार्य वहां के पंचायत प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी (पीइइओ) को कार्य सौंप दिया गया। उनको विद्यालय में एक कक्ष साक्षरता के लिए बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसे भी करीब 8 माह गुजर गए है, लेकिन अभी तक स्कूलों में न तो कक्ष बने है और न ही साक्षरता को लेकर कोई कदम बढ़ाया गया है।


महिलाओं की संख्या ज्यादा
जिले में पुरुषों की तुलना में महिलाएं कम साक्षर है। जिले के सभी दस ब्लॉक में 74 हजार 254पुरुष आज भी निरक्षर है। जबकि महिलाओं की संख्या इनसे 13 हजार 114 कम है। इस तरह जिले में 87 हजार 368 महिलाएं आज भी निरीक्षर है और अंगुठा लगाकर ही अपना काम चलाती है।


इनका कहना है
साक्षरता कार्यक्रम पिछले वर्ष 31 मार्च को समाप्त हो गया था। इसके बाद पढऩा लिखना अभियान शुरू करने के लिए कवायद शुरू हुई थी। यह कार्यक्रम अभी तक हमारे पास नहीं आया है।
ओमसिंह राजपुरोहित, जिला साक्षरता एवं सतत शिक्षा अधिकारी, पाली