
यहां नही चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश, मिलीभगत के चलते एेसे होता रहता है बजरी का अवैध खनन....
पाली. राजस्थान में बजरी खनन पर पिछले कई माह से लगी सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते पाली में बजरी की जमकर कालाबाजारी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना के लिए पुलिस को जिम्मा दे रखा है। लेकिन पुलिस, प्रशासन व खनन विभाग खुद बजरी का अवैध खनन करने वालों से मिलीभगत कर यह काम करवा रही है। 16 सितम्बर 2017 को प्रदेश में बजरी पर रोक लगी थी। तब से पूरे जिले में बजरी का अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है। पुलिस का दावा है कि वह कार्रवाई करती है, लेकिन यह दिखावटी कार्रवाई है। जिले में सभी निर्माणाधीन सरकारी भवनों के काम चल रहे हैं। यहां बजरी पुलिस की सांठ-गांठ से ही पहुंच रही है।
सोजत. सोजत समेत क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में रात्रि व अलसुबह खनन माफिया द्वारा अवैध रूप से बजरी खनन किया जा रहा है।
शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में कई निर्माण कार्य हो रहे हैं। जहां ऊचे दामों पर टै्रक्टर चालक अवैध खनन कर बजरी पहुंचा रहे हैं। नगरपालिका सीमा क्षेत्र में नाली निर्माण, सीसी निर्माण चल रहे हैं। यहां की सुकड़ी नदी, लीलड़ी नदी, जोधपुरिया गेट, बिलाडिय़ा गेट के बाहर नदी से रात्रि के समय जेसीबी की सहायता से टै्रक्टरों के कई फेरे अवैध बजरी खनन के किए जा रहे हैं। रात्रि गश्त होते हुए भी बजरी से भरे टै्रक्टर पुलिस थाना रोड सहित प्रमुख मार्गों से बेरोकटोक गुजर रहे हैं।
निमाज. उपखण्ड क्षेत्र की नदियों में अवैध बजरी खनन से जगह-जगह खदानों का रूप लेने लगी हैं। दिनरात जेसीबी, डंपर के साथ ट्रैक्टर व ट्रकों से बजरी को भर कर तिगुने और चौगुने दामों पर बेचा जा रहा है। आसरलाई, मोहराई, खेड़ामहाराजपुरा सहित अन्य गांवों में नदियों का बजरी का खनन धड़ल्ले से हो रहा है।
मारवाड़ जंक्शन . कस्बे में चल रहे रेलवे के भवनों के कार्य में बजरी का उपयोग बेखौफ किया जा रहा है। यहां रात को अंधेरे में ट्रैक्टर ट्रोली बजरी से लादकर पहुंचाया जा रहा है। कस्बे में कई मौहल्लों में भवन निर्माण का कार्य चल रहा है, जिसमें भी रेत का उपयोग बेझिझक किया जा रहा है।
बांजाकुड़ी. क्षेत्र में अवैध खनन कर लीलड़ी नदी का सीना छलनी कर दिया है। नदी से बजरी का अवैध खनन कर प्रतिदिन ट्रैक्टर ट्रॉली आदि में भरकर दूरदराज गांव में महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। बिरोल, ठाकरवास, पिपलिया खुर्द, बांजाकुड़ी, निम्बोल, फू लमाल, काणेचा, तालकिया सहित कई ग्रामीणों ने कई बार उच्च अधिकारियों को शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
लुणावा. बारवा व लुणावा की नदी में धड़ल्ले से बजरी खनन जारी है। नदी से रोजाना 50-60 ट्रैक्टर ट्रॉली व डंपर भरकर बजरी का खनन होता है। रात को बजरी खनन कर डम्परों से उदयपुर क्षेत्र में भी सप्लाई किया जा रहा है। नदी में कई स्थानों पर पांच से सात फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं। बजरी खनन के कारण नदी में बना बेस फ्लो टूट गया है। अनियंत्रित खनन के कारण कई बार बिजली के पोल भी गिर जाते हैं।
सादड़ी. अवैध बजरी खनन पर भले ही न्यायालय से रोक हो लेकिन प्रशासन, पुलिस व खनिज विभाग की अनदेखी से सादड़ी नगरपालिका क्षेत्र व आसपास गांवों में धडल्ले से बजरी, पत्थर व झीकरा का खनन किया जा रहा है।
शुक्रवार को डम्पर पलटने की घटना के बाद हरकत में आए देसूरी उपखण्ड अधिकारी राजेश मेवाड़ा के निर्देश पर तहसीलदार ने मौरखा ग्राम की सरहद में जाकर बजरी भर रहे दो ट्रैक्टर सीज किए। जिन्हें जब्त कर सादडी पुलिस को सौंपकर खनिज विभाग को जुर्माना वसूली के आदेश दिए। राणकपुर बान्ध, नलवाणिया बान्ध ओवरफ्लो, पालिका सरहद में मादा ग्राम तक मघाई नदी, माण्ड़ीगढ़ व राजपुरा बान्ध से निकलने वाली सुकड़ी नदी, मादा ग्राम सरहद तक, कुम्भलगढ़ अभयारण्य परशुराम महादेव राजपुरा, परशुराम बगेची मन्दिर से लेकर बारलीसादड़ी पुलिया, आयुर्वेद पुलिया। ऐसा कोई नदी नाला नहीं जहां से बजरी नहीं उठाई जा रही हो। पालिका क्षेत्र में करीब 4-6 करोड़ रुपए के नाली, सीसी सडक़, नाला निर्माण कार्य चल रहे हैं। जहां प्रतिदिन धड़ल्ले से बजरी परिवहन हो रहा है। राजपुरा, राणकपुर घाटसेक्शन, मोडिय़ामगरी, सेवटाबेरा, मालारी नाल, खूणी बावड़ी, हीरावाव व महाकाली गोचर से कई पर्वतमालाएं खननकर्ताओं की भेंट चढ़ गई हैं।
बाली/फालना. क्षेत्र में चल रहे सरकारी कार्यों पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में अवैध रूप से खनन कर लाई जा रही बजरी से काम चल रहा है। इन कामों को लेकर विभाग के अधिकारी पूरी तरह से मौन हैं।क्षेत्र में हो रहे बजरी के अवैध खनन की जानकारी स्थानीय पुलिस व प्रशासन के भी ध्यान में है लेकिन सभी मौन धारण किए हुए हैं।क्षेत्र में सार्वजनिक निर्माण विभाग, डिस्कॉम, रेलवे, डीएफसीसीआईएल, ग्राम पंचायत, नगरपालिकाओं में विकास कार्य, सडक़ निर्माण, भवन निर्माण, पुलिया निर्माण सहित विभिन्न कार्य चल रहे हैं।
देसूरी. क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसी नदी या बडा नाला होगा जहां से बजरी या पत्थर नहीं आते हों। सरकार की विभिन्न योजनाओं से ठेकेदारों द्वारा चलाए जा रहे बजरी पत्थर आदि धड़ल्ले से आ रहा है। यहां की बजरी की राजसमन्द व उदयपुर जिले में मांग होने की वजह से रात भर डम्परों के जरिए परिवहन किया जाता है।
Published on:
03 Jul 2018 03:31 pm
