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ड्रेगन के जाल में फंसे भारतीय व्यापारी

- चाइना निर्मित प्लास्टिक की स्वतंत्रता दिवस सामग्री खरीद ली, अब खरीदार दूर - केन्द्र की राज्यों को सलाह, प्लास्टिक के झंडे इस्तेमाल नहीं करे
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ड्रेगन के जाल में फंसे भारतीय व्यापारी

पाली. ड्रेगन (चीन) के जाल में भारतीय व्यापारी फंस गए हैं। उन्हें इस स्वतंत्रता दिवस पर करोड़ों का नुकसान हो सकता है। इसके पीछे चाइना में निर्मित प्लास्टिक की स्वतंत्रता दिवस की सामग्री खरीदना है। एकाएक प्लास्टिक के राष्ट्रीय ध्वज, झंडियां व अन्य स्वतंत्रता दिवस की सामग्री चाइना से बड़ी मात्रा में देश में आई।

सस्ती रेट के चलते भारतीय व्यापारियों ने 15 अगस्त के एक माह पहले यह बड़ी मात्रा में खरीद ली, लेकिन मीडिया, सोशल मीडिया व सरकारी स्तर पर इसके खिलाफ जागरूकता अभियान के कारण अब आमजन प्लास्टिक के झंडे खरीदने से दूर भाग रहा है। ऐसे में बाजार में यह माल बिकना मुश्किल हो रहा है। व्यापारियों ने अब इस
माल को बेचने के लिए गांवों का रुख कर लिया है, ताकि सस्ते के फेर में चाइनीज झंडे आसानी से
बिक सके।
इधर, केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर प्लास्टिक के झंडे की जगह कागज के झंडे इस्तेमाल करने की सलाह दी है। केन्द्र ने यह भी कहा है कि प्लास्टिक के झंडे नष्ट नहीं होते। इस कारण कई बार स्वतंत्रता दिवस के बाद यह सम्मानपूर्वक नहीं रह पाते, जो ठीक नहीं है।
समय से पहले नहीं चेते, अब मुश्किलें
चाइनीज सामग्री, राष्ट्रीय ध्वज, झंडे की खरीद इस बार सबसे अधिक हुई है। सूत्रों का कहना है कि करोड़ों का यह माल चाइना से मंगवाया गया है। प्लास्टिक की इस सामग्री की खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। इस कारण व्यापारियों से यह माल खरीद लिया। अब सरकार इसका उपयोग नहीं करने की सलाह दे रही है।
यह रखें ध्यान
राष्ट्रीय झंडा भारत के राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। सभी के मार्गदर्शन और हित के लिए भारतीय ध्वज संहिता-2002 में सभी नियमों, रिवाजों, औपचारिकताओं और निर्देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है।
ध्वज संहिता
भारत के स्थान पर भारतीय ध्वज संहिता-2002 को 26 जनवरी 2002 से लागू किया गया है।
यह है झंडा फहराने का सही तरीका
- जब भी झंडा फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे ऐसी जगह लगाया जाए, जहां से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
- सरकारी भवन पर झंडा रविवार और अन्य छुट्टियों के दिनों में भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है।
- झंडे का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है तो जब वक्ता का मुंह श्रोताओं की ओर हो तो झंडा उनके दाहिने ओर फहराया जाए।
- झंडे को सदा स्फूर्ति से फहराया जाए और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाए। फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाता है तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि झंडे को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।
- झंडे पर कुछ भी लिखा या छपा नहीं होना चाहिए।
- जब झंडा फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकांत में पूरा नष्ट किया जाए।
- झंडा किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचों-बीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए।
- फटा या मैला झंडा नहीं फहराया जाता है।
- झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है।
- किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा या ऊपर नहीं लगाया जाएगा और न बराबर रखा जाएगा।